- यूपीआई से कैसे अलग है ई-रुपी आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताए 5 मुख्य अंतर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने डिजिटल रुपये और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के बीच के अंतर को स्पष्ट किया. मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक के बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दास ने इस बारे में जानकारी दी.
डिजिटल मुद्रा और UPI की भूमिकाओं के बारे में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के लॉन्च के बाद आरबीआई की ओर से आए स्पष्टीकरण के बाद अब गवर्नर ने चीजों को स्पष्ट करने का प्रयास करते हुए यह जानकारी दी है.
e-rupee में नहीं होती बैंकों की मध्यस्थता
दास ने यूपीआई और e-rupee में अंतर स्पष्ट करते हुए बताया कि यूपीआई के माध्यम से लेन-देन बैंक के माध्यम से होना चाहिए, जबकि ई-रुपी के मामले में किसी बैंक की भागीदारी के बिना ही पैसा एक wallet से दूसरे wallet में transfer हो जाता है.
account के बजाय सीधे wallet में भुगतान
उन्होंने बताया कि यीपीआई के जरिये एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में रकम जाती है है,जबकि डिजिटल रुपया यानी ई-रुपी सीधे नकद भुगतान की तरह होता है. इसमें यह संभव है कि दो निजी संस्थाओं को वॉलेट प्रदान किया जा सकता है और उनके बीच पैसा स्थानांतरित किया जा सकता है, जो कि यूपीआई के साथ संभव नहीं है क्योंकि यूपीआई को भुगतान के लिए एक बैंक को शामिल करना पड़ता है."
बनी रहती है लेनदेन की गोपनीयता
गवर्नर ने कहा कि गोपनीयता डिजिटल मुद्रा की एक प्रमुख विशेषता है, क्योंकि मुद्रा एक वॉलेट से सीधे दूसरे वॉलेट में जाती है इसलिए इसका कोई डिजिटल फुटप्रिंट नहीं होता.
डिजिटल रुपयेके लेनदेन में कोई तीसरा पक्ष यह पता नहीं लगा सकता कि पैसा किसे भेजा गया है, क्योंकि यह जानकारी बैंक के पास उपलब्ध नहीं होती. इस तरह सीबीडीसी ई-रुपी के जरिये दो निजी संस्थाओं, व्यक्तियों या व्यवसायों के बीच सीधे धन की आवाजाही को संभव बनाता है.
CBDC के लिए जरूरी है PAN
दास ने कहा कि गैरकानूनी वित्तीय लेनदेनों पर लगाम कसने के लिए एक सीमा से अधिक रकम के ट्रांजेक्शन हेतु पैन की जानकारी देने की जो अनिवार्यता लागू की गई थी, वह नई लॉन्च की गई डिजिटल करेंसी ई-रुपी पर भी लागू होती है. गवर्नर ने कहा कि नकदी की तरह ई-रुपी के लिए भी तय सीमा से अधिक लेनदेन के लिए पैन देना होगा, क्योंकि दोनों ही एक प्रकार की मुद्रा हैं.

RBI Act में हुआ संशोधन
दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने RBI Act - 1934 के तहत डिजिटल मुद्रा को शामिल करने के लिए आवश्यक संशोधन किए हैं.यह संशोधन कहता है कि मुद्रा में डिजिटल मुद्रा भी शामिल होगी. इस तरह कागजी मुद्रा और डिजिटल मुद्रा में कोई अंतर नहीं है. इस संशोधन के जरिये अब रिज़र्व बैंक के पास बैंक नोट जारी करने के अधिकार के साथ डिजिटल मुद्रा जारी करने का भी अधिकार है.
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