सरकार को प्‍लास्टिक पैक का विकल्‍प सुझा कर आप भी बन सकते हैं पर्यावरण के रखवाले, 23 लाख के इनाम जीतने का मौका

 


घरेलू इस्‍तेमाल की चीजों की खरीदारी करने पर आप भी तकरीबन रोज़ ही प्‍लास्टिक के पउचों में पैक सामानों को घर लाते होंगे। पर, क्‍या आपको पता है कि प्‍लास्टिक के यह सुविधाजनक पाउच हमारे देश के पर्यावरण और समूची धरती के लिए एक बड़ी समस्‍या बनते जा रहे हैं। यह हमारे ड्रेनेज सिस्‍टम को खराब करने, नदियों को प्रदूषित करने से लेकर मिट्टी तक को खराब कर रहे हैं। कुल मिलाकर बाज़ार में धड़ल्‍ले से इस्‍तेमाल हो रहे प्‍लास्टिक के पाउच पर्यावरण से लेकर पूरे इको सिस्‍टम तक के लिए एक गंभीर खतरा बन चुके हैं। इसलिए सरकार इसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौती से निपटने के लिए देश के लोगों से सुझाव या विचार मांगे हैं। इसके लिए बायोपैकथॉन-2026। का आयोजन किया गया है। आप भी पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में भाग लेकर प्‍लास्टिक पाउचों की गंभीर समस्‍या से निपटने में सरकार की मदद कर सकते हैं। 

क्‍यों खतरनाक हैं प्‍लास्टिक के पाउच

पर्यावरण को आज सबसे ज्‍़यादा ख़तरा किसी चीज से है, तो वह है प्‍लास्टिक। इसमें भी प्‍लास्टिक के छोटे-छोटे पाउच सबसे बड़ी समस्‍या बने हुए हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाले यह छोटे पाउच चाहे वह पान मसाले, गुटखा से लेकर शैम्पू या मसाले तक की बिक्री में इस्‍तेमाल होते हैं। हालांकि मसाले, गुटखा के प्‍लास्टिक पउचों पर प्रतिबंध के बाद इनका इस्‍तेमाल बंद हो गया है, पर अन्‍च चीजों की पैकिंग में अब भी धड़ल्‍ले से इनका इस्‍तेमाल हो रहा है। नतीजतन, यह छोटे प्‍लास्टिक पाउच आज कचरा संकट का सबसे जिद्दी हिस्सा बन चुके हैं। मल्टी-लेयर प्लास्टिक (MLP) से बने ये पाउच हल्के, सस्ते, टिकाऊ और वाटरप्रूफ होने के कारण उत्‍पादों पैकिंग का एक कारगर विकल्‍प तो होते हैं, लेकिन पर्यावरण के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो रहे हैं। इसकी वजह यह है कि यह पाउच न तो आसानी से रिसाइकिल होते हैं और न ही जैविक रूप से विघटित (बायो डिग्रेड) होते हैं। ऐसे में यह पाउच नालियों में फंसकर ये शहरी जल निकासी व्यवस्था को बाधित करते हैं। इसके अलावा दशकों तक खेतों और जल स्रोतों में पहुंचकर मिट्टी और पानी की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। सरकार के “सिंगल यूज़ प्लास्टिक” पर नियंत्रण के प्रयासों के बावजूद यह पाउच अब भी सबसे कठिन चुनौती बने हुएं हैं। 

बायोपैकथॉन क्या है? 

बायोपैकथॉन-2026 एक राष्ट्रीय स्तर का हैकाथॉन है, जिसका उद्देश्य प्लास्टिक पाउच के व्यवहारिक, बायोडिग्रेडेबल और टिकाऊ विकल्प विकसित करना है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के लिए ज़रूरी तकनीकी नवाचार को देश के आम लोगों से जोड़ने की कोशिश है। यह सरकार की एक ऐसी पहल है, जिसमें उद्योग और अकादमिक संस्थान एक साथ काम कर रहे हैं और बायोपैकथॉन के ज़रिये इसमें आमजन की भागीदारी भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। बायोपैकथॉन-2026 का केंद्रीय विचार (Central idea) है “Reimagining Sachets for a Litter-Free India” यानी कचरा-मुक्त भारत के लिए सैशे की नई परिकल्पना। इसका मकसद छोटे प्‍लास्टिक पाउचों की पैकेजिंग को ऐसे नए तरीके से डिजाइन करना, जो हमारे पर्यावरण के अनुकूल हो। इस पहल के बारे में अधिकृत और विस्‍तृत जानकारी इस लिंक पर क्लिक करके हासिल की जा सकती है। 

https://moef.gov.in/storage/tender/1774414645.pdf

बायोपैकथॉन-2026 का आयोजन भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) करवा रहा है।

इस राष्‍ट्रव्‍यापी अभियान के आयोजन में प्रमुख सहयोगी संस्थाएं शामिल हैं:

  • ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS)

  • वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थान

  • पैकेजिंग और FMCG उद्योग से जुड़े भागीदार

इस साझेदारी का मकसद है कि छोटे प्‍लास्टिक पाउचों (सैशे) के विकल्‍प के तौर पर जो समाधान विकसित हों, वे केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रहें, बल्कि मानकों और नीतियों का हिस्सा बन सकें। इसलिए व्‍यावहारिक समाधान प्राप्‍त करने के लिए आम लोगों से सुझाव मांगे गए हैं, क्‍योंकि इन पाउचों के अंतिम उपभोक्‍ता (End User) यही लोग हैं।

कब तक दे सकते हैं प्रविष्टियां 

बायोपैकथॉन-2026 के लिए रजिस्‍ट्रेशन व प्रविष्टियां दाखिल करने की प्रक्रिया 25 मार्च को शुरू हो चुकी है और 24 अप्रैल 2026 तक इसमें प्रविष्टियां दाखिल की जा सकती हैं। प्रविष्टियां एक निर्धारित प्रारूप के तहत ही जमा करनी होंगी, जिसे इस लिंक के जरिये भारतीय मानक ब्‍यूरो यानी Bureau of Indian Standards की वेबसाइट पर जाकर देखा जा सकता है - https://services.bis.gov.in/php/BIS_2.0/biopackathon/assets/images/Draft_Submission_template.pdf

बायोपैकथॉन-2026 के नियमों और शर्तों की जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें -

https://services.bis.gov.in/php/BIS_2.0/biopackathon/terms-and-conditions

पुरस्कार और प्रोत्साहन: केवल इनाम नहीं, अवसर भी

बायोपैकथॉन-2026 की पुरस्कार संरचना इसे एक गंभीर और परिणामोन्मुख प्रतियोगिता बनाती है। इसमें विजेताओं को न केवल पहचान मिलती है, बल्कि उनके नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत आधार भी दिया जाता है। इसमें सर्वश्रेष्‍ठ सुझाव देने वालों को नकद पुरस्कार प्रदान कर उनके सुझाए गए नवाचार को सरकार की ओर से सीधा समर्थन दिया जाएगा। इसके तहत प्रतियोगिता में शीर्ष तीन विजेताओं को आकर्षक नकद पुरस्कार दिए जाएंगे, जो इस प्रकार होंगे :

  • प्रथम पुरस्कार: 10 लाख रुपये

  • द्वितीय पुरस्कार: 7 लाख रुपये

  • तृतीय पुरस्कार: 5 लाख रुपये

यह राशि केवल सम्मान नहीं, बल्कि एक इनोवेशन ग्रांट के रूप में होगी, जिससे प्रतिभागी अपने प्रोटोटाइप को व्यावसायिक स्तर तक विकसित कर सकेंगे।

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