पहले दिन ही सुपर फ्लॉप हुई 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' आईटी सेल का प्रमोशन भी नहीं आ रहा काम


एक्टर से डायरेक्‍टर बने रणदीप हुड्डा की फिल्म 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' का कलेक्शन बॉक्स ऑफिस पहले दिन ही फिल्म औंधेमुंह गिरा है। हालत यह रही कि बीजेपी आईटी सेल और अंधभक्‍तों के वाट्सएप ग्रुपों में जमकर प्रमोशन किए जाने के बावजूद जयादातर सिनेमा हॉलों में पहले शो में भी आधी-चौथाई सीटें तक नहीं भर पाईं।


फिल्‍म में रणदीप हुड्डा वीर दामोदर सावरकर के रोल में नजर आए हैं। इस फिल्म में अंकिता लोखंडे वीर सावरकर की पत्नी यमुना बाई बनी हैं। फिल्म अपनी ओपनिंग पर ही मेकर्स की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। 


बॉक्‍स ऑफिस रिपोर्ट करने वाली साइट Sacnilk की रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' ने पहले दिन आधी कमाई भी नहीं नहीं कर सकी, जितनी की उसके निर्माताओं द्वारा उम्मीद की जा रही थी। 


फिल्म के पहले दिन का कलेक्‍शन ही जैसे-तैसे एक करोड़ के आंकड़े पर पहुंच पाया। अब निर्माताओं को उम्‍मीद है कि शायद फिल्म वीकेंड पर कुछ बेहतर कमाई कर सके। बताया जा रहा है कि इसके लिए बीजेपी की आईटी सेल को इस फिल्‍म को प्रमोट करने का टास्‍क दिया गया है। साथ ही कई फर्जी फिल्‍म समीक्षाएं भी तैयार कराई गई हैं, जिन्‍हें भाजपा समर्थक वाट्सऐप ग्रुपों में जबरन शेयर किया जा रहा है।


समीक्षकों का बताना है कि बॉक्स ऑफिस पर अजय देवगन की हॉरर फिल्म शैतान का जादू छाया हुआ है और 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' नई रिलीज होने के बावजूद उसके आसपास भी नहीं फटक पा रही है। 


बताया जा रहा है कि पहले हफ्ते में बुरी तरह फ्लॉप होने के बाद अब सावरकर पर बनी फिल्‍म को यूपी, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान जैसे भाजपा शासित राज्‍यों में टैक्‍स फ्री कराने की कोशिशें हो रही हैं। रणदीप हुड्डा की टीम इसे लेकर इन राज्‍यों की सरकारों से संपर्क भी कर चुकी है, जिसके बाद कुछ राज्‍यों में इसे टैक्‍स फ्री का दर्जा मिल सकता है। 


सरकारी प्रोपोगंडा के तहत बनाई गई यह फिल्‍म अपने निर्माण की शुरुआत के समय से ही विवाद में रही है। जिसके चलते इसके निर्देशक महेश मांजरेकर ने फिल्‍म छोड़ दी थी। इसके बाद कई निर्देशकों से संपर्क किया गया, पर फिल्‍म की पटकथा देखने के बाद कोई भी इसे हाथ में लेने को राजी नहीं हुआ। अंत में कोई निर्देशक न मिलने पर खुद रणदीप हुडा को निर्देशन की कमान संभालनी पड़ी, जिसके चलते यह फिल्‍म बद से बदतर हो गई। 


बताया जाता है कि मांजरेकर ने इस फिल्‍म में रणदीप हुडा द्वारा हिटलर, लोकमान्‍य तिलक और भगत सिंह से जुड़े कई फर्जी प्रसंग जोड़ने की कोशिश के चलते खुद को फिल्‍म से अलग कर लिया। मिसाल के तौर पर फिल्‍म में भगत सिंह की सावरकर से मुलाकात दिखाई गई है, जबकि सावरकर की मृत्‍यु के समय भगत सिंह की उम्र महज़ 3 साल की थी। 


कहा तो यह भी जा रहा है कि रणदीप हुडा फिल्‍म में बीजेपी सरकार द्वारा कार्नाटक बोर्ड की किताबों में डाले गए उस प्रसंग को भी डालना चाहते थे, जिसमें बताया गया था सावरकर एक बुलबुल की पीठ पर बैठकर अंडमान की जेल की कोठरी से घूमने निकल पड़ते थे। 


फिल्म 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' के बारे में कहा जा रहा है कि फिल्म में लीड रोल को महिमामंडित करने में कई बड़ी भूल हुई है निर्देशक से। दरअसल फिल्म की कहानी ये नैरेटिव सेट करती दिख रही कि चापेकर बंधू, कान्होजी आंग्रे से लेकर भगत सिंह, मदनलाल ढींगरा और सुभाष चंद्र बोस जैसे तमाम महान स्वतंत्रता सेनानियों और नेताओं को आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए किसी और ने नहीं बल्कि सावरकर ने ही प्रेरित किया। 


फिल्म में इस एक किरदार को श्रेष्ठ बताने के लिए अन्य महत्वपूर्ण एतिहासिक किरदारों को छोटा बताया जाना ही लोगों को काफी खटक रहा है। इन्‍ही सब हास्‍यासपद बातों के चलते अपने पहले हफ्ते में कमाई के मामले में फिल्म ने एकदम स्लो शुरुआत की है।


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