मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के अंतिम पूर्ण बजट में पूंजीगत खर्च यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए दिल खोल कर रकम दी गई है. आज संसद में 2023 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भारतीय अर्थव्यवस्था को ग्लोबल आर्थिक मंदी की आशंकाओं से बचाने की कोशिश करती दिखीं.
विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार ने पूंजीगत खर्च में मजबूती का यह कदम इस साल मांग में कमी आने की आशंका के चलते निजी निवेश में गिरावट से निपटने के लिहाज़ से उठाया है. इसी के तहत पूंजीगत क्षेत्र में राज्यों के खर्च पर विशेष ध्यान देते हुए केंद्र सरकार ने बजट 2023-24 में कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ाने की अपनी योजना को जारी रखा.
सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, "पूंजीगत खर्च को लगातार तीसरे वर्ष 33 प्रतिशत बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये किया जा रहा है, जो कि देश के सकल घरेलू उत्पाद का 3.3 प्रतिशत होगा. यह 2019-20 में किए गए कैपिटल एक्सपेंडिचर का लगभग तीन गुना है." वित्त मंत्री ने कहा कि इस वृद्धि का उद्देश्य आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है.
केंद्र का पूंजीगत व्यय 13.7 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जो देश की जीडीपी का करीब 4.5 प्रतिशत होगा. पूंजीगत खर्च के तहत विभिन्न कामों के लिए राज्य सरकार की ओर से यह राशि 50 वर्ष के लंबे समय के कर्ज के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी.
मौजूदा बजट में सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर पिछले बजट के ही अनुरूप है, जिसमें केंद्र की योजनाओं में बंपर बढ़ोतरी देखी गई थी. सरकार के इस कदम का मकसद देश की अर्थव्यवस्था को कोविड के झटके से उबारना था.
माना जा रहा है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर पर सरकार के इस जोर के चलते सड़क और अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी. साथ ही इससे देश में रोजगार के नए अवसर पैदा करने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि यह सेक्टर देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 8 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है और लगभग चार करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है.
साथ ही पूंजीगत ढांचे का सेक्टर रियल एस्टेट और मैन्युफैक्चरिंग जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों के विकास में भी मदद देता है. दूसरी ओर इसमें सेक्टर में खर्च बढ़ने से स्टील और सीमेंट जैसे बड़े उद्योगों को भी बढ़ावा मिलता है, क्योंकि इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में इन दोनों ही चीजों का भरपूर इस्तेमाल होता है.
क्या होता है कैपिटल एक्सपेंडिचर
कैपिटल एक्सपेंडिचर या पूंजीगत व्यय सरकारी खर्च का वह हिस्सा होता है जो सड़क, रेल, हाईवे, डैम और स्कूल जैसे मूलभूत ढांचों जैसी फिक्स्ड एसेट्स के निर्माण पर खर्च किया जाता है. इस तरह यह देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास और देश की आर्थिक तरक्की में काफी अहम भूमिका निभाता है.

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