कच्चा तेल लेकर जा रहे भारत सहित दुनिया के कई देशों के जहाजों को काला सागर में तुर्की की जल सीमा में में रोक दिया गया है. बीच समुद्र जहाजों के जमावड़े की यह यह समस्या तुर्की द्वारा तेल टैंकरों के बीमा कागजात के निरीक्षण प्रक्रिया में सख्ती के कारण खड़ी हुई है.
तुर्की द्वारा डाली गई इस बाधा के चलते लाखों बैरल कच्चा तेल वैश्विक बाजारों में पहुंचाने वाले कई जहाज पिछले कुछ दिनों से समुद्र में अटके हैं और आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं. इससे 10 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल लेकर भारत आ रहे तेल टैंकर भी काला सागर में फंस गए हैं.
कुछ टैंकर भारत, दक्षिण कोरिया और पनामा जा रहे हैं. उन्नीस टैंकरों में कजाकिस्तान से निकला सीपीसी क्रूड है. वहीं, एक टैंकर, जो भारत तेल लेकर आ रहा है, उसमें 10 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल लदा है.
जी-7 देशों द्वारा रूसी कच्चे तेल की मूल्य सीमा तय करने के बाद तुर्की अब जहाजों से बीमा करने वाली कंपनियों का गारंटी कवर दिखाने की मांग कर रहा है, जिससे यह पता चल सके कि जहाज पर लदा तेल 60 डॉलर प्रति बैरल या इससे कम कीमत पर ही खरीदा गया है.
बता दें कि यूक्रेन पर रूस के हमले के चलते उसे आर्थिक झटका देकर सबक सिखाने के लिए जी-7 देशों ने रूस के क्रूड पर 60 डॉलर प्रति बैरल की सीमा लागू कर दी है. यानी रूस का तेल इससे ज्यादा कीमत पर नहीं खरीदा जा सकेगा.
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