होली की आग पर नंगे पांव चलते हैं इस गांव के लोग : वजह जानकर रह जाएंगे हैरान !


होली हमारे देश के अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग अंदाज़ और रीति-रिवाज के साथ मनाई जाती है। आज हम आप को एक ऐसी अनूठी होली के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में जानकर आप चौक जाएंगे। 


कहां है यह अनूठा गांव

कान्हा की नगरी मथुरा का छाता तहसील जहां के फालेन गांव में दशकों से एक अनोखी कृष्ण कालीन प्रथा चली आ रही है। यहां आस्था में डूबे पंडा अनोखी प्रथा निभा रहे हैं। होलिका दहन के समय गांव का पंडा आग की बड़ी -बड़ी लपटों को बीच से पार करते हैं और सुरक्षित निकल जाते हैं. फालेन गांव की होली का यह नजारा वाकई में दंग कर देने वाला है. 


बसंत पंचमी से ही त्याग देते हैं अन्न

काफी दशकों से चली आ रही परंपरा के अनुसार होलिका दहन में आग की लपटों को पार करने वाले पंडा बसंत पंचमी से ही गांव के मंदिर में जमीन पर ही सोते हैं. फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से वह अन्न का त्याग कर आहार में केवल फल व दूध इत्यादि लेते हैं. वह दोनों वक्त मंदिर में हवन करते हैं. इन दिनों इस अनोखे होलिका दहन की तैयारी में पूरा गांव जुटा रहता है, जो गांव के ही प्रह्लाद मंदिर के पास में मनाया जाता है.


गांव वाले चुनते हैं पंडा

गांव के लोग मिलकर पंडा का चयन करते हैं. लगभग 20 से 25 फीट ऊंची और चौड़ी होलिका गांव वाले मिलकर तैयार करते हैं. होलिका दहन का समय भी पंडा ही तय करते हैं. होलिका दहन का मुहूर्त बनते ही पंडा पास के प्रह्लाद कुंड में स्नान करने निकलते हैं और होलिका में आग लगाकर तैयारी की जा चुकी होती है. पंडा की बहन प्रह्लाद कुंड से होलिका दहन स्थल तक रास्ते में पानी डालती है, जिसपर चलकर पंडा दौड़ते हुए प्रह्लाद कुंड से आते हैं और धधकती हुई आग की लपटों को चीरते हुए दूसरी तरफ से बाहर निकल जाते हैं.


मानते हैं इसे मंत्र का चमत्कार

गांव वाले इसे प्रह्लाद मंत्र का चमत्कार मानते हैं।यहां आग की मोटी लपटों को चीरकर पंडा निकलते हैं। पंडा को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है, ये चमत्कार आस्था के कारण ही संभव हैं।


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