जोमैटो (Zomato) और स्विगी (Swiggy) जैसे ऑनलाइन ऐप-आधारित फूड डिलिवरी प्लेटफार्मों के जरिये खाना मंगाना नए साल से महंगा हो सकता है.
सरकार ने इसपर 5 प्रतिशत GST लगा दिया है. हाल ही में हुई जीएसटी परिषद की 45वीं बैठक में फूड-डिलिवरी कंपनियों को टैक्स के दायरे में लाने का फैसला किया था.
इस टैक्स को ऑर्डर की डिलीवरी के स्थान पर वसूला जाएगा. इसके साथ ही कार्बोनेटेड फ्रूट ड्रिंक्स और जूस पर 28 फीसदी +12 फीसदी जीएसटी लगेगा. सरकार द्वारा लिया गया ये फैसला 1 जनवरी 2022 से लागू हो जाएगा.
हालांकि, सरकार का कहना है कि इसका ग्राहकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि ग्राहकों से अतिरिक्त टैक्स नहीं वसूला जाएगा. पहले कर रेस्तरां द्वारा देय था, अब रेस्तरां के बजाय कर एग्रीगेटर द्वारा देय होगा.
एक अधिकारी के मुताबिक ऐप से खाना मंगाए जाने पर रेस्टोरेंट ग्राहकों टैक्स के पैसे ले रहे थे. लेकिन ज्यादातर रेस्टोरेंट सरकार को टैक्स नहीं दे रहे थे.
इसे देखते हुए ही सरकार ने ये कदम उठाया है कि आपके खाना ऑर्डर करने फूड एग्रीगेटर ही कंज्यूमर से टैक्स लेकर अथॉरिटी को देगा, न कि रेस्टोरेंट. इस तरह कोई नया टैक्स नहीं लगा है.
वहीं, वित्त मंत्री ने कहा कि फूड डिलिवरी ऐप स्वैगी व जोमैटो से खाना मंगाने पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की कोई बात नहीं है. ये ऐप वही टैक्स वसूलेंगे जो रेस्टोरेंट कारोबार पर लगता है.
अलबत्ता जीएसटी काउंसिल के फैसले के बाद खाने-पीने के सामान में कार्बोनेटेड फ्रूट ड्रिंक महंगा हुआ है. इस पर 28% का GST और उसके ऊपर 12% का कंपनसेशन सेस लगेगा. इससे पहले इस पर सिर्फ 28% का GST लग रहा था.
इसके अलावा आइसक्रीम खाना महंगा हो जाएगा. इस पर 18% टैक्स लगेगा. मीठी सुपारी और कोटेड इलायची अब महंगी पड़ेगी. इस पर 5% GST लगता रहा था जो अब 18% हो गया है.
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