किसान भाइयों सावधान ! खेती में ये छोटी सी गड़बड़ी कर देगी बहुत बड़ा नुकसान

बेहतर दाम पाने के लिए बड़ी संख्‍या में किसान साधारण किस्‍मों के बजाय बासमती चावल की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों में अच्‍छी मांग के कारण बासमती की खरीद भी निर्यातकों द्वारा किसानों से काफी अच्‍छी कीमतों पर कर ली जाती है। इसे देखते हुए बासमती की खेती का चलन बढ़ रहा है, पर कई किसान एक बड़ी चूक कर जाते हैं, जिसके कारण बासमती की उपज में उन्‍हें फायदे के बजाय भारी नुकसान उठाना पड़ जाता है।

निर्यात वाले चावल के मामले में ये देश कैमिकल अवशेष मुक्त कृषि उत्पादों की ही खरीद करते हैं, यह बात हमारे देश के किसान अकसर खेती के दौरान भूल जाते हैं और उसमें भरपूर मात्रा में कीटनाशकों और रसायनों का उपयोग कर बैठते हैं, जो उनके लिए नुकसानदायक साबित होता है।

इसे देखते हुए कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) और बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन (BEDF) ने किसानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है.

एपिडा ने किसान भाईयों से अपील की है कि वह बासमती निर्यात को बढ़ाने के लिए रसायन अवशेष मुक्त बासमती धान का उत्पादन करें. यह कैसे संभव होगा इसके लिए सलाह दी गई है.

बीईडीएफ के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. रितेश शर्मा का कहना है कि जब भी फसल में रोग लगे तो कृषि वैज्ञानिक से संपर्क करें. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर आप जरूरत से अधिक यूरिया नहीं डाल रहे हैं और पानी का प्रबंधन सही है तो बिना दवा के भी बासमती चावल पैदा हो सकता है.

इस नंबर पर मिलेगी उपयोगी सलाह बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन ने किसानों की सहूलियत के लिए एक हेल्पलाइन नंबर (8630641798 ) जारी किया है. उस पर फोटो भेजकर किसान बासमती धान में लगने वाले रोगों और कीड़ों की समस्या से निदान पा सकते हैं. रसायनों का प्रयोग राज्य विश्वविद्यालय व कृषि विभाग की सिफारिश के आधार पर ही करें.

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