अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां अर्जित करने वाली भारत की महिला धावक पी टी ऊषा के जन्म दिन पर आज हम आपको बताने जा रहे हैं वह कहानी जिसके चलते 1984 के ओलंपिक में सेकेंड के सौवें हिस्से से उनके हाथ से पदक फिसल गया था।
उषा ने जब 1984 में हुए लॉस एंजेल्स ओलंपिक गेम्स के लिए क्वालिफ़ाई किया था तो वह किसी उपलब्धि से कम नहीं था, लेकिन लॉस एंजेल्स में दुर्भाग्य का वह खेल हुआ, जो किसी ने सोचा भी नहीं था।
बुलंद हौसले के साथ मैदान में उतरी ऊषा को ओलंपिक के पहले राउंड की हीट में शानदार फ़िनिश प्रदर्शन किया और वह 400 मीटर हर्डल्स में दूसरे स्थान पर रहीं।
सेमीफ़ाइनल में उन्होंने ब्राउन को एक बार फिर मात देकर फ़ाइनल के लिए क्वालिफ़ाई कर लिया था, पर फाइनल में ऊषा पदक के बेहद क़रीब थीं और सेकंड के 100वें भाग (1/100) सेकंड्स से वह रोमानिया की क्रिस्टिएना कोजोकारु से पीछे रह गईं, जिन्हें कांस्य पदक मिला था।
सामान्यत- देखने में लग रहा था कि उषा पदक जीत गई हैं, पर फोटो फिनिश की मदद से क्रिस्टिएना को कांस्य पदक विजेता घोषित किया गया। इस फैसले ने भारतीय खेल प्रेमियों को काफी निराश किया था।
पदक गंवाने के वर्षो बाद उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया था किस तरह प्रतिकूल हालात के चलते उन्हें लॉस एंजिलिस ओलंपिक में पदक गंवाना पड़ा था।
उषा ने बताया था कि 1984 के ओलंपिक के दौरान खेलगांव में उन्हें फाइनल दौड से पहले की रात खाने में केवल चावल के दलिये और अचार पर निर्भर रहना पड़ा था. वह इसी सेकंड के सौवें हिस्से से पदक से चूक गई थी.
उषा ने कहा कि बिना पोषक आहार के खाने से उन्हें कांस्य पदक गंवाना पड़ा था. इससे उनके प्रदर्शन पर असर पड़ा और अपनी दौड़ के आखिरी 35 मीटर में उनकी ऊर्जा बनी नहीं रह सकी थी।
उषा ने इंटरव्यू में कहा था कि ‘हम दूसरे देशों के खिलाड़ियों को ईर्ष्या के साथ देखते थे, जिनके पास पूरी सुविधाएं मौजूद थीं. हम सोचते थे कि काश एक दिन हमें भी ऐसी ही सुविधाएं मिलेंगी।

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