कोविड 19 की कोविशील्ड वैक्सीन के साइड इफेक्ट के गंभीर साइड इफेक्ट्स का खुलासा होने के बाद मोदी सरकार इस मामले में घिरती ही जा रही है। वैक्सीन भारत में विकसित होने की गलत जानकारी और नियमों को ताक पर रख कर करोड़ों लोगों को वैक्सीन लगवाने को लेकर जहां विपक्ष सरकार पर जमकर हमला बोल रहा है, वहीं अब यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत में भी पहुंच गया है।
कोविशील्ड के साइड इफेक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने याचिका दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि कोविशील्ड वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका द्वारा लंदन में माना गया है कि इसके कारण बहुत बिरले मामलों में खून का थक्का जमना या प्लेटलेट की संख्या घटना आदि शामिल है।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की गहन जांच कराने की मांग की है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक जांच के लिए पैनल गठित की मांग की है। याचिका में कोविशील्ड वैक्सीन बनाने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका द्वारा ब्रिटेन की अदालत में वैक्सीन के गंभीर साइड इफेक्ट होने की बात स्वीकार किए जाने का हवाला दिया है।
एस्ट्राजेनेका ने कोर्ट में माना है कि कोविड-19 की उसकी वैक्सीन से टीटीएस जैसे गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं। टीटीएस को मेडिकल की भाषा में थ्रोम्बोसइटोपेनिया सिंड्रोम कहा जाता है, जो शरीर में खून के थक्के जमने की वजह बनती है। इससे स्ट्रोक, हृदय गति थमने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
एस्ट्राजेनेका ने माना है कि उसका कोविड-19 वैक्सीन का जो फॉर्मूला था उसी से भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ने कोवीशील्ड नाम से वैक्सीन बनाई है, जिासे खतरनाक साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। हालांकि, वैक्सीन में किस चीज की वजह से यह बीमारी होती है, इसकी जानकारी फिलहाल कंपनी के पास नहीं है।

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