Electoral Bond के मुद्दे पर मोदी सरकार लगातार घिरती नजर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद SBI ने बॉन्ड की जानकारी तो चुनाव आयोग को सौंप दी है, पर इसे सार्वजनिक किए जाने के प्रयास इसके बावजूद जारी हैं।
Electoral Bond की जानकारी को 15 मार्च को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर डालकर सार्वजनिक किया जाना है। पर, ऐसा होने से पहले ही इसे रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष आदिश अग्रवाल ने एक बेहद घटिया और अजीबोगरीब काम कर दिया है।
खबर सामने आई है कि अग्रवाल ने 12 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखा इसमें उसने इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले (Electoral Bond SC Verdict) पर 'प्रेजिडेंशियल रेफरेंस' के तहत रोक लगाने की मांग की है।
हालांकि ऐसा पत्र लिखे जाने की घिनौनी हरकत का खुलासा होने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने खुद को उस पत्र से अलग कर लिया है. साथ ही साथ इस पत्र की निंदा भी की है.
SCBA ने कहा है "सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिशन की कार्यकारी समिति के सदस्यों ने अध्यक्ष आदिश अग्रवाल को ऐसा कोई भी पत्र लिखने का अधिकार नहीं दिया है. यह पत्र ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के लेटरहेड पर लिखा गया और आदिश अग्रवाल ने इसे अपनी व्यक्तिगत क्षमता में लिखा."
SCBA ने आदिश अग्रवाल की इस घटिया हरकत की निंदा करते हुए कहा है "SCBA की कार्यकारी समिति आदिश अग्रवाल के इस कदम और पत्र की सामग्री को माननीय सुप्रीम कोर्ट के इक़बाल को कम करने के प्रयास के तौर पर देखती है और स्पष्ट तौर पर इसकी निंदा करती है."
संविधान के अनुच्छेद 143 का जिक्र करते हुए आदिश अग्रवाल ने लिखा था, "सुप्रीम कोर्ट को खुद ही ऐसे फैसले नहीं देने चाहिए जिनसे संवैधानिक गतिरोध पैदा हो, जिनसे भारतीय संसद की महिमा और उसके सदस्यों की सामूहिक बुद्धिमत्ता कमजोर होती हो और राजनीतिक दलों की अपनी लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा हो."
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इस मामले पर सुनवाई की थी. कोर्ट ने SBI की इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे पर 30 जून तक का समय देने की मांग को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि SBI 12 मार्च तक इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ा डेटा चुनाव आयोग को सौंपे.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से घबराई मोदी सरकार ने Electoral Bond के मुद्दे को दरकिनार करने के लिए उसी दिन नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी CAA लागू कर दिया, जिसे चुनाव के वक्त चुनावी चंदे के भ्रष्टाचार पर चर्चा का रुख मोड़ने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.
हालांकि CAA लागू किए जाने के बावजूद Electoral Bond का मुद्दा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है, जिसके चलते अब यह जानकारी जनता के सामने आने से रोकने के घिनौने प्रयास किए जा रहे हैं.
आदिश अग्रवाल की इस हरकत को चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में निर्वाचन अधिकारी अनिल मसीह द्वारा खुले आम आठ बैलेट पेपरों को खराब करने की हरकत जैसा बताया जा रहा है. लोग कह रहे हैं सियासत इस कदर बेशर्मी के दौर में आ गई है कि ऐसी गिरी हुई हरकतें भी अब खुले आम की जा रही हैं.

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