राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने वाले भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 2019 से जारी किए गए चुनावी बॉन्डों के बारे में जानकारी नहीं दी है। एसबीआई के इस रवैये को देश की सर्वोच्च अदालत की अवमानना के रूप में देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में एसबीआई पर अवमानना का केस चलाने को लेकर एक याचिका भी दाखिल की गई है। एडीआर ने एसबीआई के खिलाफ अदालत में अवमानना की अर्जी दाखिल की है। एडीआर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अपनी अर्जी में कहा कि यह तो शीर्ष अदालत के आदेश के खिलाफ है। इस मामले की 11 मार्च को सुनवाई हो सकती है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी देने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को 6 मार्च तक का वक्त दिया था। अब तक एसबीआई ने यह डिटेल चुनाव आयोग को नहीं दी है, जिसे आयोग को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना था। अब यह मामला एक बार फिर से शीर्ष अदालत में पहुंचा है।
इस बीच स्टेट बैंक ने भी अदालत में अर्जी दायर कर डिटेल देने के लिए कुछ और समय की मांग की है। एसबीआई की इस अर्जी पर भी 11 तारीख को ही सुनवाई हो सकती है।
उधर, राजस्थान कांग्रेस आज इलेक्ट्रोल बॉन्ड को SBI द्वारा सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर प्रदेश भर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। राजधानी जयपुर में भी शहर कांग्रेस की ओर से सुबह 10 बजे न्यू गेट के पास एसबीआई बैंक के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
इसके अलावा प्रदेशभर में जिला मुख्यालयों के साथ-साथ एसबीआई बैंक शाखाओं के सामने प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी ने बताया कि प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा ने सभी जिला कांग्रेस कमेटी और ब्लॉक कमेटियों को एसबीआई की शाखाओं पर विरोध-प्रदर्शन करने के लिए कहा है।
उन्होंने कहा कि चुनावी बॉन्ड योजना की प्राथमिक लाभार्थी भाजपा है, जिसे बॉन्ड के जरिये सबसे ज्यादा चंदा मिला है। इसलिए मोदी सरकार के इशारे पर एसबीआई चुनावी बॉन्ड के बारे में जानकारी देने में आनाकानी कर रहा है। इसका सीधा सा मतलब है कि दाल में काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।

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