Electoral Bond के जरिये चंदाखोरी पर पर्दा डालने के प्रयासों में एसबीआई को कड़ी फटकार के बाद अब सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर मोदी सरकार की खटिया खड़ी कर सकता है।
एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की तरु से इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने सरकार से पूछा है कि जब मामला कोर्ट में लंबित था तो नियुक्ति क्यों की गई। सरकार को सुप्रीम कोर्ट में इस बात का जवाब 21 मार्च को देना है। हालांकि कोर्ट ने अंतरिम आदेश के जरिये चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति रद्द करने से इनकार कर दिया।
ADR के अलावा मध्य प्रदेश की कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने भी मामले में एक याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर बने नए कानून में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) को चयन समिति से बाहर कर दिया गया है। ऐसे में यह प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही गई।सिलेक्शन कमेटी में CJI का होना जरूरी है।
याचिकाकर्ता की तरफ से सुनवाई के दौरान कहा गया कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के नए कानून के मुताबिक दो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति गुरुवार को हो चुकी है। इस नियुक्त से SC के फैसले की अवहेलना हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 2 मार्च को नियुक्ति से जुड़े मामले के फैसले में कहा था कि इन पदों पर नियुक्ति का फैसला चीफ जस्टिस, पीएम और विपक्ष के नेता वाली कमेटी ही करेगी।
याचिकाकर्ताओं ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर एंड इलेक्शन कमिश्नर अपॉइंटमेंट, कंडिशन ऑफ सर्विस एंड टर्म ऑफ ऑफिस एक्ट-2023 की धारा-7 को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन करता है।
याचिका के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सिलेक्शन कमेटी में प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को होना चाहिए। केंद्र सरकार ने 2023 में जो कानून बनाया है, उसमें सिलेक्शन कमिटी में चीफ जस्टिस को हटाकर उनकी जगह PM की ओर से नामित केंद्रीय मंत्री को रखा गया है। इससे चयन प्रक्रिया खतरे में पारदर्शिता खत्म हो जाएगी और पक्षपात, मनमानी व हेरफेर का अंदेशा है।
बता दें कि गुरुवार शाम को केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी करके पूर्व IAS अफसर ज्ञानेश कुमार और सुखबीर संधू चुनाव आयोग में चुनाव आयुक्त नियुक्त किया है। गुरुवार की सुबह ही इनकी नियुक्ति को लेकर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले पैनल ने बैठक की। इसके बाद नेता विपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने नियुक्ति की प्रक्रिया पर असंतोष जताते हुए इन नामों के तय होने की संभावना जताई थी।
सुखबीर उत्तराखंड के मुख्य सचिव और NHAI के चेयरमैन रह चुके हैं, जबकि ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अफसर हैं। वह धारा 370 पर फैसले के वक्त गृह मंत्रालय में थे और सहकारिता मंत्रालय में सचिव पद से रिटायर हुए हैं।

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