CAA, बदायूं कांड, केजरीवाल की गिरफ्तारी : इनमें है एक खास कनेक्‍शन, जानकर होंगे हैरान !


  • समाचार विश्‍लेषण / टिप्‍पणी

कई साल पहले संसद से पास हो चुके संशोधित नागरिकता कानून यानी CAA ठीक लोकसभा चुनाव के वक्‍त लागू किया जाना। चुनावी अधिसूचना जारी होने के बाद यूपी के बदायूं में डबल मर्डर कांड में हिन्‍दू-मुस्लिम एंगल निकाला जाना और अब दिल्‍ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी। 


ये तीनों ही चीजें अपने आप में पूरी तरह से अलग-अलग हैं और ऊपरी तौर पर इनमें कोई सीधा रिश्‍ता नज़र नहीं आता, पर गौर से देखें तो एक खास बिंदु पर इनकी कडि़यां आपस में कहीं न कहीं जुड़ी नजर आती हैं। वह बिंदु है, इन तीनों चीजों की टाइमिंग, जो लोकसभा चुनाव और इलेक्‍टोरल बांड की चंदाखोरी के खुलासे के साथ की है। 


तीनों चीजों की 'क्रोनोलॉजी' को अगर आप समझ लेंगे तो आपको इसके पीछे छिपी सियासत की तस्‍वीर साफ नज़र आ जाएगी। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले CAA को लागू करने को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर उंगलियां पहले से ही उठ रही हैं कि करीब चार साल पहले संसद से पारित होने के बावजूद इसे लागू करने की अधिसूचना देश में आम चुनाव से ठीक पहले क्‍यों जारी की गई?


 CAA को चुनाव से ठीक पहले लागू करने को विपक्ष वोटों के ध्रुवीकरण का प्रयास बता रहा है। बदायूं कांड को भी इस ध्रुवीकरण की कोशिश के अगले कदम के रूप में देखा जा रहा है। इसकी तुलना राजस्‍थान में हुए दर्जी कन्‍हैयालाल की हत्‍या के मामले से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके जरिये राज्‍य में सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की गई और बाद में हत्‍या आरोपी के तार भाजपा के अल्‍पसंख्‍यक प्रकोष्‍ठ से जुड़े पाए गए।


बदायूं कांड के बाद अब दिल्‍ली के सीएम केजरीवाल की गिरफ्तारी कर ली गई, जिससे पूरे देश में तेजी से चर्चा में आए इलेक्‍टोरल बांड की धोखाधड़ी की बहस का रुख सियासी गिरफ्तारी की ओर मोड़ दिया गया। 


राजनीति विश्‍लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव तक इस तरह की अलग-अलग घटनाएं होती रहेंगी, ताकि इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड के जरिये चुनावी चंदा उगाही के मुद्दे को ठंडा किया जा सके। 


बता दें कि चुनावी बॉन्‍ड के मामले में बॉन्‍ड जारी करने वाला एसबीआई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद जानकारियां देने में पहले ही आनाकानी कर चुका है। कोर्ट की लताड़ के बाद उसने जैसे-तैसे आधी-अधूरी जानकारियां देकर और सबसे अहम जानकारी यानी बॉन्‍ड के नंबर को छुपा कर मामले पर पर्दा डालने की पूरी कोशिश की। 


हालांकि इस चालाकी पर एसबीआई को कोर्ट में दोबारा बहुत ही तगड़ी लताड़ खानी पड़ी। जिसके बाद एसबीआई का चेयरमैन बॉन्‍ड की सारी जानकारी देने के साथ ही यह हलफनामा देने को भी मजबूर हुआ कि उसने कोई जानकारी छुपाई नहीं है। 


चुनावी बॉन्‍ड के नंबर और उनको खरीदने और भुनाने की तारीखें सामने आने के बाद कई बड़े खुलासे होने और ईडी की कार्रवाई के बाद कई कंपनियों द्वारा बॉन्‍ड के जरिये चंदा दिए जाने की दर्जनों मामले सामने आने के आसार हैं। इसलिए कहा जा रहा है कि चुनाव की बेला में इस गड़बड़झाले से लोगों का ध्‍यान भटकाने के लिए सीएए, बदायूं और केजरीवाल की गिरफ्तारी की घटनाएं करवाई जा रही हैं, जो पूरे चुनाव तक जारी रहेंगी।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ