किसान आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान, CJI ने कह दी ये बड़ी बात !


न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी समेत कई लंबित मांगों को पूरा किए जाने के लिए एक बार फिर से किसानों के आंदोनल के जोर पकड़ने के साथ ही सत्‍ता की दलाल गोदी मीडिया ने इसे बदनाम करना शुरू कर दिया है। 


किसानों के आंदोलन को बदनाम करने की नीयत से कुछ स्‍थानों पर चक्‍का जाम से लोगों को हो रही परेशानी की खबरों को बढ़ाचढ़ा कर पेश करने का सिलसिला ठीक उसी तरह शुरू हो गया है, जैसे पिछली बार सरकार के पालतू टीवी चैनलों के चापलूस एंकरों व संपादकों ने किया था, जबकि हकीकत यह थी कि सरकार ने खुद ही बैरिकेड लगवा कर और रास्‍ते पर कीलें बिछवा कर ज्‍यादातर सड़कों को बंद करवाया था। 


बहरहाल, मोदी सरकार की इन प्‍लांटेड खबरों के बीच सरकार के पिछलग्‍गू वकीलों के एक समूह द्वारा किसान आंदोलन से वकीलों की आवाजाही में हो रही दिक्कतका रोना रोते हुए एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी लगाई गई जिसमें कोर्ट से इस मामले में स्‍वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है। 


मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कुछ ऐसी बात कह दी कि याचिकाकर्ताओं की हालत सांप-छछूंदर जैसी हो गई। सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में घसीट कर मोदी सरकार के दमनात्‍मक रवैये को तर्कसंगत ठहराने के मंसूबे पर पानी फिर गया। 


दरअसल सीजेआई ने कहा कि अगर किसी भी वकील को आवाजाही की वजह से दिक्कत हो रही है तो हम उस हिसाब से समय में बदलाव करेंगे. सीजेआई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला एवं जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने दिन की कार्यवाही की शुरुआत में वकीलों से कहा कि अगर किसी को ट्रैफिक जाम के कारण कोई समस्या होती है, तो ‘हम समायोजन कर लेंगे.’


दरअसल सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर किसानों के दिल्ली चलो मार्च को स्वत: संज्ञान लेकर एक्शन लेने का अनुरोध किया था. बार एसोसिएशन ने सीजेआई चंद्रचूड़ से अनुरोध किया कि किसानों के विरोध प्रदर्शन के कारण आज जो वकील कोर्ट में पेश ना हो पाए, उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया जाए.


बता दें कि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने समेत अन्य मांगों को लेकर दो केंद्र सरकार के साथ बैठक बेनतीजा रहने के बाद पंजाब से किसानों ने मंगलवार को सुबह अपना ‘दिल्ली चलो’ मार्च शुरू कर दिया है. 


संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने घोषणा की है कि अपनी मांगों को लेकर केंद्र पर दबाव बनाने के वास्ते 200 से अधिक किसान संगठन दिल्ली तक मार्च करेंगे.

 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ