प. बंगाल में राष्‍ट्रपति शासन ! ममता की कुर्सी खतरे में, प्रेसिडेंट को सौंपी गई रिपोर्ट : जानिए पूरा मामला

पंश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी पर मुसीबतें बढ़ती ही जा रही हैं। एक के बाद एक राजीनतिक झटकों के बाद अब उनकी सीएम की कुर्सी ही खतरे में पड़ती नज़र आ रही है। इसकी वजह बन सकती है संदेशखाली में हुई हिंसा।

राष्ट्रीय अनुसूची आयोग(एनसीएससी) राज्‍य का दौरा करके जमीनी स्तर पर जानकारी जुटाने के बाद राष्ट्रपति भवन को एनसीएससी की पूर्ण पीठ ने रिपोर्ट भेज दी है, जिसमें हर कदम पर बंगाल पुलिस प्रशसान द्वारा असहयोग से लेकर जांच में लापरवाही समेत कई और आरोप लगाकर बंगाल में राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा की गई है।


राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष अरुण हलदर ने बताया कि आयोग ने संदेशखाली में टीएमसी समर्थकों द्वारा महिलाओं के कथित उत्पीड़न पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी अपनी रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वहां के हालात ठीक नहीं है। 


हलदर ने बताया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को संदेशखाली का दौरा किया था। आयोग ने संदेशखाली में टीएमसी समर्थकों द्वारा महिलाओं के कथित उत्पीड़न पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी अपनी रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की है। 


बता दें कि संदेशखाली मामले में अनुसूचित जाति की महिलाओं व लोगों पर अत्याचार का आरोप तृणमूल नेता उत्तम सरदार और तृणमूल नेता शिवप्रसाद हाजरा उर्फ शिबू पर लगा है। अनुसूचित आयोग की टीम गुरुवार संदेशखाली गई थी। क्षेत्र का दौरा करने के बाद अनुसूचित आयोग ने राष्ट्रपति भवन को रिपोर्ट सौंपी। हालांकि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन आयोग के अध्यक्ष अरुण हलदर ने कहा कि वे राष्ट्रपति शासन की मांग करते हैं।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ