कांग्रेस के इस मुख्‍यमंत्री की जा सकती है कुर्सी : थम नहीं रार, चरम पर पहुंचा 'पॉलिटिकल ड्रामा'


राज्‍यसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस के उम्‍मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी की हार के बाद पार्टी मे मची रार थमने का नाम नहीं ले रही है। विधायकों की क्रॉस वोटिंग से शुरू हुआ बखेड़ा अब सरकार गिरने और मुख्‍यमंत्री सुखविंदर सुक्खू के इस्‍तीफे की पेशकश तक पहुंच गई है। 

मंत्री और विधायकों की नाराजगी के बीच हिमाचल के सीएम सुक्खू ने कांग्रेस ऑब्जर्वर्स भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार के सामने अपने इस्तीफे की पेशकश की है। अब इस पर कांग्रेस हाईकमान फैसला लेगी। इससे पहले खबर आई थी कि सुक्खू ने इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, शाम को कांग्रेस विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नए नेता का चुनाव किया जा सकता है।


राज्‍य में उफान पर पहुंची राजनीतिक हलचल के बीच एक तरफ कांग्रेस की सरकार संकट में है तो वहीं उसे बचाने के लिए विधानसभा में भी गणित खेला जा रहा है। विधानसभा स्पीकर ने पूर्व सीएम जयराम ठाकुर समेत भाजपा के 15 विधायकों को सत्र से निष्कासित कर दिया है। 


इस ऐक्शन के बाद सदन में किसी भी वोटिंग के लिए 10 विधायक ही मौजूद होंगे। ऐसा हुआ तो बजट बिना किसी रुकावट के ही पास हो जाएगा और सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो जाएगा। सदन स्थगित होने से नाराज विधायकों को मनाने के लिए कुछ वक्त मिल जाएगा।


भाजपा के जिन विधायकों को निष्कासित किया गया है, उनमें जयराम ठाकुर, विपिन सिंह परमार, रणधीर शर्मा, लोकेंद्र कुमार, विनोद कुमार, हंसराज, जनकराज, बलबीर वर्मा, त्रिलोक जम्वाल, सुरेंद्र शोरी, दीप राज, पूरन ठाकुर, इंदर सिंह गांधी और दिलीप ठाकुर शामिल हैं। 


स्पीकर का कहना है कि इन लोगों पर सदन में हंगामा और नारेबाजी करने के आरोप में ऐक्शन लिया गया है। वहीं भाजपा का कहना है कि यह अन्यायपूर्ण कार्रवाई है। स्पीकर ने कांग्रेस की सरकार को बचाने के लिए इस तरह का ऐक्शन लिया है।


इससे पले आज सुबह पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य ने भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने रोते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने छह बार के सीएम वीरभद्र सिंह, अपने और विधायकों के अपमान का आरोप लगाया और कहा कि असंतोष का यह नतीजा है।


उधर, सुबह जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा नेताओं ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला से मुलाकात की थी। इस मीटिंग में उन्होंने कांग्रेस सरकार के अल्पमत में होने का दावा किया था। 


माना जा रहा है कि सदन में फ्लोर टेस्ट होने या फिर बजट पास कराने के लिए वोटिंग की मांग होने पर कांग्रेस सरकार के अल्पमत में होने का खतरा था। ऐसी स्थिति से बचने के लिए स्पीकर ने भाजपा के 15 विधायकों को ही निष्कासित कर दिया है। 


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