श्रद्धालुओं को चकित कर रहा अयोध्‍या के राम मंदिर से भी विशाल यह भव्‍य मंदिर


22 जनवरी को उत्‍तर प्रदेश के अयोध्‍या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्‍ठा की चर्चा सारी दुनिया में हुई। राम मंदिर के आकार, स्‍वरूप और भव्‍यता को लेकर तरह-तरह की बातें कहीं गई और 2025 तक मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने की भी बात कही जा रही है. इस बीच देश के एक अन्‍य हिन्‍दी भाषी राज्‍य राजस्‍थान में एक अपने आप में अनूठा और भव्‍य मंदिर बन कर तैयार हो गया है, जिसके बारे में कम ही लोगों को पता है. आज हम आपको इसी अनोखे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। 

राजस्थान के पाली में विश्व का पहला ॐ आकार का शिव मंदिर बनकर तैयार हो गया है. मंदिर की दिव्यता और भव्यता देखकर लोगों आंखें चमक जा रही हैं. पाली जिले के जाडन में करीब 250 एकड़ में ओम आकार का मंदिर बनाया गया है. यह विश्व का पहला ओम आकार का शिव मंदिर है. 

लगातार 28 वर्ष तक काम करने के बाद अब मंदिर ने पूरा ओम आकर ले लिया. 10 फरवरी से 19 फरवरी तक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित किया गया. ओम आकार का दुनिया का एकमात्र यह भव्य मंदिर है. मंदिर में पहाड़ और तालाब भी कृत्रिम बनाए गए हैं. 250 एकड़ में चार मंजिला इमारत और 108 कमरे इस प्रकार बनाए गए हैं कि ओम आकार साकार होता है. ओम आकार के भव्य मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंग स्वरूप भगवान शिव का मंदिर है. साथ ही 1008 प्रतिमाएं भगवान शिव की इस मंदिर में लगी हुई हैं.

इस योग मंदिर के परिसर में मुख्‍य मंदिर के अलावा और भी कई भवन हैं, जो शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य जैसे सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए हैं। इनमें प्रमुख रूप से यज्ञवेदी जैसा दो मंजिला गुरुकुल, स्वास्तिक के आकार में हॉस्टल, और तारानुमा अस्पताल भवन है. मंदिर का हर कोना आकर्षण का केंद्र है.

लोगों को सनातन संस्कृति और योग से जोड़ने के लिए तीर्थ प्रेणता श्री अलखपूरी सिद्धपिठ परंपरा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर महेश्वरानंद महाराज ने इसे मूर्त रूप दिया है. उन्होंने इसका सपना 40 वर्ष पूर्व देखा था. जब एक विदेशी पर्यटक ने उन्हें कहा कि भारत यात्रा के दौरान उसने ताजमहल को नहीं देखा इसलिए उसकी यात्रा अधूरी रही. तब उन्होंने ओम आकर का एक मंदिर बनाने के बारे में सोचा और 23 जनवरी 1995 को जाडन के पास इसका शिलान्यास किया.

शिव मंदिर के साथ सात ऋषियों की समाधि भी  है. साथ ही इचार मंजिला स्कूल कॉलेज भी है. मंदिर की इमारत में नागर शैली का स्थापत्य है. वास्तु कला भी उत्तर भारतीय है. आधा किलोमीटर के दायरे में फैले मंदिर की नींव रख जाने के वक्त देशभर से साधु संत आए थे. मंदिर में भगवान शिव की 1008  प्रतिमाएं हैं. मंदिर में कुल 108 कमरे हैं.

मंदिर का शिखर 135 फीट ऊंचा है. सबसे ऊपरी भाग में शिवलिंग है. शिवलिंग पर ब्रह्मांड की आकृति अंकित है. इस मंदिर में खास बात यह है कि आश्रम के निर्माण में धौलपुर का गुलाब बंसी पहाड़पुर का पत्थर उपयोग में लिया गया है. 

मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में देश-विदेश के सैकड़ों लोग आए. उनके ठहरने और खाने के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई . विदेशी मेहमानों के लिए सो स्वीट होम बनाए गए . आश्रम में तीन हेलीपैड भी तैयार करवाए गए .

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