बिहार में सरकार और विपक्ष के बीच मचे राजनीतिक भूचाल के बीच एक बड़े सियासी बदलाव की खबर सामने आ रही है। प्रदेश के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर (Rajendra Vishwanath Arlekar) ने फ्लोर टेस्ट के पहले एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने कानूनी सलाहकारों को बदल दिया है।
राजभवन सचिवालय द्वारा इस संबंध में जारी अधिसूचना के अनुसार डॉ. कृष्ण नंदन सिंह को चीफ लीगल एडवाइजर, राजीव रंजन पांडेय को लीगल एडवाइजर कम रिटेनर और जनार्दन प्रसाद सिंह को एडिशनल काउंसिल बनाया गया है।
राज्य में कल यानी 12 फरवरी को विधानसभा में सरकार के शक्ति परीक्षण को लेकर बीते एक सप्ताह से ही सियासी हलचलें काफी तेज हैं। पक्ष-विपक्ष की पार्टियां अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कवायद में लगी हैं।
शनिवार को दोपहर सत्तारूढ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) विधायक एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए मंत्री श्रवण कुमार के आवास पर आयोजित दावत में शामिल हुए लेकिन कुछ विधायक इस दौरान नदारत थे।
इन विधायकों की गैर मौजूदगी के बारे में जदयू नेता और मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि पार्टी के सभी विधायक एकजुट हैं। जो नहीं आए हैं उनमें से कुछ रास्ते में है, कुछ पटना से बाहर और कुछ बीमार हैं।
दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के आवास पर राजद विधायक बैठक में शामिल होने आए। उसके बाद सभी विधायकों को उनके आवास पर ही रोक लिया गया है। बताया जा रहा है कि राजद के विधायक शक्ति परीक्षण तक यहीं रहेंगे।

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