
Kalki Dham Tample in Sambhal
आज अपने यूपी दौरे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संभल के कल्कि धाम में देवालय का शिलान्यास किया। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सपा का गढ़ माने जोन वाले यूपी के बुंदेलखंड क्षेत्र में आने वाले संभल में एक नए मंदिर के उद्घाटन को धर्म-कर्म से ज्यादा सियासत से जोड़कर देखा जा रहा है। Kalki Dham Tample in Sambhal
पीएम सपा के गढ़ संभल में कल्कि धाम के शिलान्यास के बहाने यूपी में काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद एक और धार्मिक प्रतिष्ठान की स्थापना के जरिये भाजपा की संघ आधारित हिन्दुत्ववादी छवि को उभारने का सियासी संदेश दिया।
शिलान्यास कार्यक्रम में मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज यूपी की पावन धरती से भक्ति, भाव और अध्यात्म की एक और धारा प्रवाहित होने को लालायित है। पूज्य संतों की साधना और जनमानस की भावना से आज एक और पवित्र धाम की नींव रखी जा रही है। मुझे विश्वास है कि कल्कि धाम भारतीय आस्था के एक और विराट केंद्र के रूप में उभरकर सामने आएगा।
पीएम मोदी ने यूपी की पिछली सपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कई ऐसे अच्छे काम हैं, जो कुछ लोग मेरे लिए ही छोड़ कर चले गए हैं। आगे भी जितने अच्छे काम रह गए हैं, उनको भी संतों और जनता-जनार्दन के आशीर्वाद से हम पूरा करेंगे।
सपा के गढ़ में पीएम मोदी के आगमन का आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को कितना फायदा मिल पाएगा यह बताना अभी जल्दबाजी होगी पर इससे इस क्षेत्र में सियासी हलचल जरूर बढ़ गई है।
जानिए कल्कि धाम मंदिर की खूबियां
यह मंदिर संभल के एंकरा कंबोह इलाके में बनने जा रहा है। इस मंदिर को सफेद और भगवा रंग से सजाया जा रहा है। अयोध्या के राम मंदिर निर्माण के बाद अब कल्कि धाम सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया। इसकी एक खास बात यह है कि लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे आचार्य प्रमोद कृष्णम श्री कल्कि धाम निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। उन्हीं के बुलावे पर पीएम ने यहां आकर शिलान्यास किया।
कल्कि मंदिर विष्णु के 10वें और आखिरी अवतार कल्कि को समर्पित है। सनातन धर्म में मान्यता है कि कलयुग के अंत में विष्णु भगवान कल्कि प्रकट होंगे। इस लिहाज से यह मंदिर दुनिया भर में अनोखा है क्योंकि यह भगवान के जिस अवतार के लिए मंदिर बन रहा है अभी वह प्रकट ही नहीं हुआ है।
हिन्दू मंदिरों में जहां आमतौर पर एक या दो गर्भगृह होते हैं, वहीं इस मंदिर में 10 गर्भगृह होंगे। इन दसों गर्भगृहों में भगवान के अलग-अलग दसों अवतारों की प्रतिमाएं स्थापित होंगी। इस मंदिर का निर्माण उसी गुलाबी पत्थर से किया जा रहा है, जो अयोध्या के राम मंदिर और सोमनाथ मंदिर में इस्तेमाल हुआ है। करीब 5 एकड़ में बनने वाले इस मंदिर में भी स्टील या लोहे का इस्तेमाल नहीं होगा। इसे बनने में करीब 5 साल का वक्त लगेगा।
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