ले रखी हे LIC तो जान लीजिए ये जरूरी खबर, वर्ना हो सकता है नुकसान !


जीवन बीमा के तहत अनक्‍लेम्‍ड राशि वह राशि है, जिसमें पॉलिसीधारक द्वारा पॉलिसी के प्रीमियम का भुगतान तो किया गया है, पर पॉलिसीधारक या उसके नॉमिनी द्वारा बीमा राशि का क्‍लेम नहीं लिया गया हो. 

जीवन बीमा निगम (LIC) के जीवन बीमा के तहत यदि लगभग 3 वर्ष या उससे अधिक समय तक बीमा राशि बीमाकर्ता को नहीं मिलती है, तो इसे अनक्‍लेम्‍ड यानी दावा न की गई राशि कहा जाता है. इसकी गणना पॉलिसी की परिपक्वता तिथि (मैचयोरिटी डेट), जिस तारीख से पॉलिसीधारक ने प्रीमियम का भुगतान बंद कर दिया है, या पॉलिसीधारक की मृत्यु की तारीख के आधार पर की जाती है.


अनक्‍लेम्‍ड रकम की जांच कैसे करें


  • एलआईसी की आधिकारिक वेबसाइट https://licindia.in/ पर जाएं.


  • ऑनलाइन सेवाएं टैब पर जाएं और दावा न की गई राशि विकल्प चुनें.


  • अपना पॉलिसी नंबर और जन्मतिथि प्रदान करें.


  • अपने खाते में लॉगिन करें, और आप अपनी दावा न की गई राशि देख पाएंगे.


  • यदि कोई समस्या बनी रहती है, तो एलआईसी शाखा कार्यालय पर जाएं या कस्‍टमर केयर सेवा से संपर्क करें.


कैसे करें राशि का दावा 

अनक्‍लेम्‍ड राशि प्राप्‍त करने के लिए पॉलिसीधारक को आवश्यक दस्तावेजों के साथ एक फॉर्म जमा करना होगा. आपको जिन दस्तावेज़ों की आवश्यकता होगी वे हैं पॉलिसी दस्तावेज़, प्रीमियम रसीद और मृत्यु प्रमाण पत्र (यदि लागू हो). फॉर्म एलआईसी कार्यालय से प्राप्‍त कर सकते हैं या आप इसे आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड भी कर सकते हैं. उचित दस्तावेजों के साथ फॉर्म जमा करना आवश्यक है. इसके बाद ही  आगे की कार्रवाई की जाएगी और बीमा कंपनी दावा न की गई राशि जारी कर देगी.


कुछ स्थितियों में, नामांकित व्यक्ति यानी नॉमिनी को इस प्रकार की पॉलिसी या आवश्यक दस्तावेजों के बारे में जानकारी नहीं होती है. नामांकित व्यक्ति को पॉलिसी के बारे में पता होना चाहिए, और पॉलिसीधारक को नॉमिनेशन पॉलिसी को हमेशा अपडेट रखना चाहिए.


क्‍लेम न करने पर क्‍या होता है

यदि आप राशि का दावा नहीं करने का विकल्प चुनते हैं, तो कंपनी आमतौर पर इन दावा न की गई राशियों को सरकारी प्रतिभूतियों या अन्य स्वीकृत निवेशों में निवेश करती है और उन्हें अनक्‍लेम्‍ड अमाउंट के खाते में जमा कर देती है. रकम तब तक खाते में रहेगी, जब तक पॉलिसीधारक या उसका कानूनी उत्तराधिकारी दावा प्रस्तुत नहीं करता और राशि का भुगतान नहीं कर दिया जाता.


जानकारी या दस्‍तावेज न होने के भी होते हैं मामले

कुछ मामलों में पॉलिसीधारक पॉलिसी के बारे में भूल गया होता है या बीमा पॉलिसी होने से ही अनजान होता है. ऐसा भी हो सकता है कि उन्हें आवश्यक दस्तावेज़ों की जानकारी न हो या, कुछ मामलों में उनके पास आवश्यक दस्तावेज़ ही न हों. ऐसे मामले भी होते हैं, जिनमें पॉलिसीधारक की मृत्यु दावा किए बिना या नामांकित व्यक्ति का चयन किए बिना ही हो गई होती है. इसलिए हमेशा यह सुझाव दिया जाता है कि आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर और अपनी पॉलिसी को हमेशा अपडेट करते रहें.


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