कई वैश्विक और स्थानीय डिस्ट्रेस्ड ऐसेट इंवेस्टर अप्रैल में शुरू हुए वित्तीय वर्ष में बिक्री के लिए रखे गए भारतीय स्टेट बैंक के कुछ फंसे हुए कर्जों को खरीदने पर विचार कर रहे हैं.
ब्लूमबर्ग न्यूज के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में एसबीआई ने करीब 960 बिलियन रुपये (11.6 बिलियन डॉलर) के गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) में बदल चुके 331 बैड लोन की एक सूची संभावित निवेशकों को भेजी है.
एसबीआई के इन एनपीए को खरीदने में जिन निवेशकों ने रुचि व्यक्त की है उनमें न्यूयॉर्क स्थित सेर्बेरस कैपिटल मैनेजमेंट एलपी, हांगकांग मुख्यालय वाले एससी लोवी और एवेन्यू कैपिटल ग्रुप एलएलसी समर्थित एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (इंडिया) लिमिटेड शामिल हैं. यह जानकारी नाम न छापने की शर्त पर मामले से जुड़े सूत्रों द्वारा दी गई है. उन्होंने कहा कि अन्य संभावित स्थानीय खरीदारों में अरबपति उदय कोटक समर्थित फीनिक्स एआरसी प्राइवेट, जेएम फाइनेंशियल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी और रिलायंस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी भी शामिल हैं.
- एसबीआई के बैड लोन खरीदेंगे टॉप डिस्ट्रेस्ड फंड, संभावित खरीदारों को भेजी 960 बिलियन रुपये के एनपीए लोन की सूची
हालांकि एसबीआई, एआरसीआईएल और जेएम फाइनेंशियल ने इस बारे में पूछे जाने पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. सेर्बेरस, एससी लोवी, रिलायंस एआरसी, फीनिक्स ने ब्लूमबर्ग द्वारा ईमेल किए गए प्रश्नों का जवाब नहीं दिया.
बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दो साल पहले जारी की गई एक रिपोर्ट के बाद संकटग्रस्त कर्ज की पहचान करना भारतीय बैंकों के लिए एक जरूरी प्रक्रिया बन चुकी है. यह नियम संकटग्रस्त संपत्तियों की खरीद और बिक्री को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए लागू किया गया है. 2018 में देश के पूंजी बाजार को हिलाकर रख देने वाले बैंकिंग संकट से बचने के बाद भारत का बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा यह कदम उठाया गया था.
इसी कवायद के तहत अबतक एसबीआई की लगभग चार दर्जन संकटग्रस्त संपत्तियां चर्चा के लिए सामने आई हैं. बताया जा रहा है कि निवेशक अधिक बकाया मूल्य वाली संपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं. मामले की प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार एसबीआई ने पिछले वित्तीय वर्ष में भी कुल 350 अरब रुपये की 150 संकटग्रस्त संपत्तियों की सूची तैयार की थी.

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