मोदी सरकार का काला कारनामा ! आरटीआई पोर्टल से महत्‍वपूर्ण जानकारियां ग़ायब !


कई महत्‍वपूर्ण मामलों में सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी देने में टालमटोल और बहानेबाजी करने के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व वाली केंद्र सरकार ने अब इस मामले में एक और काला कारनामा कर दिखाया है. 

'दि वायर' की खबर के अनुसार आरटीआई पोर्टल से कई अति महत्‍वपूर्ण जानकारियों को हटवा दिया गया है. मोदी सरकार के इस कदम को सीधे तौर पर सूचना के अधिकार पर हमले के तौर पर देखा जा रहा है, क्‍योंकि यह पोर्टल नागरिकों को केंद्र सरकार से सार्वजनिक सूचना तक पहुंच के लिए ही बनाया गया था. उसके डेटा के साथ इस प्रकार की छेड़छाड़ को सूचना के अधिकार के साथ छेड़छाड़ माना जा रहा है.


खबर के मुताबिक कई सूचना का अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस बात की पुष्टि की है कि आरटीआई पोर्टल से वर्षों का डेटा गायब हो गया है. सूचना का अधिकार कार्यकर्ताओं ने बुधवार को पाया कि उनके पिछले आवेदनों के रिकॉर्ड सैकड़ों की संख्या में आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल से गायब हो गए हैं. 


रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्य प्रदेश के एक आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने कहा कि उनके एकाउंट में भी दिक्कत आवेदन गायब होने के संबंध में है. इसके अलावा द हिंदू द्वारा उपयोग किए गए दो एकाउंट में भी कई वर्षों के आवेदन और उनके जवाब गायब हैं.


बता दें कि इससे पहले पिछले साल केंद्र सरकार ने ‘भारी लोड’ का हवाला देते हुए पोर्टल पर एकाउंट बनाने की सुविधा हटा दी थी. इसके अलावा यह शर्त भी जोड़ दी गई थी कि अगर मौजूदा एकाउंट होल्डर अपने एकाउंट को बरक़रार रखना चाहते हैं तो उन्हें छह महीने की अवधि में कम से कम एक आवेदन दाख़िल करना होगा.


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