पांच साल और बिना वेतन काम करेंगे मुकेश अंबानी : 'बेगारी' का पूरा खेल जानकर रह जाएंगे हैरान !


देश के कारोबार जगत की आज की सबसे बड़ी खबर मुकेश अंबानी को अगले पांच साल के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) बनाने के प्रस्‍ताव से जुड़ी है। 


मुख्‍यधारा की मीडिया से लेकर बिजनेस चैनलों और न्‍यूज पोर्टलों पर अंबानी की एक बार फिर से ताजपोशी की खबर को काफी प्रमुखता से स्‍थान दिया गया है, जो सही भी है, क्‍योंकि यह देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने और उसके लाखों-लाख शेयर धारकों के हितों से जुड़ी खबर है। रिलायंस जैसे विशाल कॉरर्पोरेट समूह की गतिविधियों का असर देश की अर्थव्‍यवस्‍था पर भी पड़ता है। इस‍ लिहाज़ से भी यह खबर काफी अहमियत रखती है। 


विभिन्‍न प्‍लेटफार्मों पर इस बारे में प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने मुकेश अंबानी को अगले पांच साल के लिए शून्य वेतन पर कंपनी का चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) नियुक्त करने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी मांगी है। यानी वह इस पद पर कार्य करने के लिए कोई वेतन नहीं लेंगे। तथ्‍यात्‍मक रूप से यह खबर बिल्‍कुल सही है, पर जिस ढंग से इस खबर को जनता के सामने परोसा गया है, उसमें झोल नज़र आता है।


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इन खबरों में मुख्‍य फोकस इस बात पर दिया गया है कि मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के सीएमडी के रूप में काम करने के लिए कंपनी से कोई वेतन नहीं लेंगे। खबरों की भाषा व उसे पेश करने का अंदाज कुछ इस तरह का है, जिससे कंपनी के शेयरधारकों और आम लोगों के बीच यह संदेश जाए कि कंपनी के शीर्ष पद पर बिना वेतन काम करके अंबानी कितना भलाई और सहृदयता का काम कर रहे हैं। वह चाहते तो करोड़ों रुपये का वेतन ले सकते थे, पर वह इतने महान हैं कि कंपनी और शेयरधारकों के हित में बिल्‍कुल मुफ्त में काम कर रहे हैं। 


जबकि, मामले की तह तक जाएं तो हकीकत इसके ठीक विपरीत है। मुकेश अंबानी दरअसल वेतन न लेकर कंपनी या शेयरधारकों का नहीं, बल्कि खुद अपना भला कर रहे हैं। वह भी थोड़ा-मोड़ा नहीं करोड़ों के वारे-न्‍यारे कर रहे हैं। वेतन न लेने के पीछे का खेल क्‍या है वह हम आपको बहुत ही सीधे-सपाट शब्‍दों में समझाये देते हैं। दरअसल मुकेश अंबानी सैलरी इसलिए नहीं ले रहे हैं, क्योंकि करोड़ों की सैलरी लेने पर 30% इनकम टैक्स लगेगा। ये लोग सैलरी की जगह कंपनी के शेयर लेते हैं, क्योंकि शेयर लेने पर टैक्स नहीं लगता (केवल शेयर बेचने पर टैक्स लगता है। इसलिए इन शहरों शेयरों को बेचने पर ये लोन ले लेते हैं, जिसपर ब्याज दर कैपिटल गेन टैक्स से कम होती है। इस तरह शेयरों के बदले इन्हें बिजनेस बढ़ाने के लिए अच्छी खासी पूंजी भी मिल जाती है और टैक्स भी नहीं देना पड़ता है।


मुकेश अंबानी का बिना वेतन काम करने का खेल यहीं पर खत्‍म नहीं हो जाता। यह इससे भी कई कदम आगे जाता है क्‍योंकि उन्‍हें अगले पांच साल के लिए एक बार फिर से सीएडी बनाए जाने के लिए कंपनी बोर्ड में जो विशेष प्रस्‍ताव यानी स्पेशल रिजाल्युशन लाया गया है, उसमें में कहा गया है कि इस दौरान उनके ट्रैवल, बिजनेस ट्रिप के दौरान पत्नी सहित बोर्डिंग और लॉजिंग यानी यात्रा, रहनेृ खाने सहित अटेंडेंट्स और कारों की व्यवस्था से लेकर उनके घर पर कम्युनिकेशन आदि पर होने वाले खर्च कंपनी ही उठाएगी। बिजनेस ट्रिप के दौरान मुकेश अंबानी और उनके परिवार की सिक्योरिटी पर होने वाले खर्च को भी कंपनी ही वहन करेगी। यहां ध्‍यान देने वाली बात यह है कि यह कोई छोटा-मोटा खर्च नहीं बल्कि करोड़ों का व्‍यय होगा। गौर करने वाली बात यह भी है कि अगर ये सारे अंबानी और उनके परिवार के ये सारे खर्चे कंपनी ही उठाएगी, तो उन्‍हें भला वेतन लेने की जरूरत ही क्‍या रह जाती है, जो इस बात को इतना बढाचढ़ा कर बताया जा रहा है। 

बता दें कि  इस नए कार्यकाल के दौरान अंबानी (66) मुख्य कार्यकारी के पद के लिए कंपनी कानून के तहत जरूरी 70 साल की आयुसीमा को पार कर जाएंगे और आगे नियुक्ति के लिए उन्हें शेयरधारकों के विशेष प्रस्ताव की जरूरत है। इसलिए विशेष प्रस्ताव में रिलायंस ने अंबानी को अप्रैल, 2029 तक कंपनी का चेयरमैन नियुक्त करने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी मांगी गई है। अंबानी रिलायंस के निदेशक मंडल में 1977 से हैं और जुलाई, 2002 में अपने पिता और समूह के संस्थापक धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद कंपनी के चेयरमैन बन गए थे।


शेयरधारकों को भेजे गए विशेष प्रस्ताव में रिलायंस ने कहा कि उसके निदेशक मंडल ने 21 जुलाई, 2023 को मुकेश अंबानी को प्रबंध निदेशक के तौर पर आगे पांच साल के लिए नियुक्ति करने को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव में कहा गया कि अंबानी ने वित्त वर्ष 2008-09 से वित्त वर्ष 2019-20 तक अपना वार्षिक पारिश्रमिक 15 करोड़ रुपये तय किया था। इसके बाद वित्त वर्ष 2020-21 के बाद से उन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण अपना वेतन छोड़ने का विकल्प चुना।

 

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