पृथ्वी की कक्षा से बाहर चला गया चंद्रयान, जानिए अब क्‍या करेंगे इसरो वैज्ञानिक !


भारत का दूसरा मून मिशन यानी चंद्रयान-3 पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकल कर  तेजी से चांद की ओर बढ़ रहा है. अबतक पूरा मिशन पूर्वनियोजित योजना के अनुसार ठीक ढंग से चल रहा है और वैज्ञानिक अब चंद्रयान की चंद्रमा पर सकुशल लैंडिंग करा कर अगले चरण को अंजाम देने की की तैयारी में जुट गए हैं.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक चंद्रयान-3 को पृथ्वी की कक्षा से घूमने की प्रक्रिया को पूरा और चंद्रमा की ओर रवाना करने के घंटों बाद यान बिलकुल सामान्य तरीके से काम कर रहा है. 


चंद्रयान-3 को पृथ्वी की कक्षा से ऊपर उठाकर चंद्रमा की ओर बढ़ाने की प्रक्रिया को मंगलवार तड़के सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया. एजेंसी ने बताया कि सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अब अगले चार दिनों में चंद्रयान को चंद्रमा की कक्षा में स्थापित किया जाएगा.


ट्रांसलूनर कक्षा में डाला, अगले चार दिन बेहद महत्‍वपूर्ण

चंद्रयान को अगली कक्षा में धकेलने के चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. यह प्रक्रिया तब पूरी गई जब अंतरिक्ष यान पृथ्वी के सबसे करीब यानी पेरिजी की स्थिति में था. इस प्रक्रिया के तहत यान को ‘ट्रांसलूनर कक्षा’ में डाल दिया गया है, जिसमें यह चंद्रमा के प्रभाव क्षेत्र में प्रवेश करेगा है. अब अगले चार दिनों में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया के तहत अंतरिक्ष यान को चंद्रमा की कक्षा में स्थापित किया जाएगा. चंद्रयान को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कराने की प्रक्रिया तब शुरू की जाएगी, जब वह उसके सबसे नजदीक होगा.


5 अगस्त को होगा लूनर-ऑर्बिट इंसर्शन

इसरो ने कहा, चंद्रयान-3 ने पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाने के चरण को पूरा कर लिया है और अब वह चंद्रमा की ओर बढ़ रहा है. अगला कदम चंद्रमा है. उसके चंद्रमा के करीब पहुंचने के बीच 5 अगस्त 2023 को लूनर-ऑर्बिट इंसर्शन (चंद्र-कक्षा अंतर्वेश) की प्रक्रिया को अंजाम देने की योजना है. ट्रांसलूनर-इंजेक्शन के बाद चंद्रयान-3 मंगलवार को पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकल गया और अब वह उस पथ पर अग्रसर है, जो उसे चंद्रमा के करीब ले जाएगा.


23 अगस्त को होनी है चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग

इसरो 23 अगस्त को चंद्रयान-3 की चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ कराने की कोशिश करेगा. इससे पहले, चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को प्रक्षेपित किए जाने के बाद से उसे कक्षा में ऊपर उठाने की प्रक्रिया को पांच बार सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया था.


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ