- रेपो रेट न बढ़ने से घर खरीदारों और हाउसिंग सेक्टर को मिली बड़ी राहत
अगर आप भी होम लोन लेकर अपने सपनों का आशियाना पाना चाहते हैं, तो भारतीय रिजर्व बैंक का आज का फैसला आपको राहत देने वाला है .आरबीआई ने आज अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा के तहत रेपो दरों को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है. अंदाज़े के विपरीत ब्याज दरों को स्थिर रखने का यह फैसला हाउसिंग और रीयल एस्टेट जैसे सेक्टरों के लिए फायदेमंद साबित होंगी. साथ ही इससे घर खरीदारों को भी राहत मिलेगी.
विशेषज्ञों के अनुसार आरबीआई यह फैसला रीयल एस्टेट बाजार, खासकर हाउसिंग सेक्टर के लिए अच्छा है. बड़े कॉर्पोरेट्स द्वारा बड़े पैमाने पर छंटनी जैसी कठिन स्थिति से गुजर रहे इस सेक्टर को इस फैसले से राहत मिलेगी. द्विमाही मौद्रिक समीक्षा में रेपो दरों को अपरिवर्तित रखने का आरबीआई का फैसला घर खरीदारों के लिए एक स्वागत योग्य कदम है.
यह फैसला सस्ते घर खरीदने वालों और मध्य वर्ग के होम बायर्स को खास तौर पर राहत देने वाला कदम है, जिन्हें
आज आरबीआई द्वारा दरों में वृद्धि की आशंका सता रही थी. अगर ऐसा होता तो इन लोगों के लिए होम लोन लेकर घर खरीद पाना और भी महंगा हो जाता. पर आरबीआई ने दरों में कोई बढ़ोतरी न करके इस वर्ग के होम बायर्स को बड़ी राहत दी है.
कोविड महामारी के बाद से ही सस्ते घरों के बाजार में मंदी का माहौल है. इस सेगमेंट 40 लाख रुपये तक की कीमत वाले घरों की बिक्री में कोविड के बाद 2019 और 2022 तक गिरावट देखी है. यह सेक्टर इस गिरावट से अब तक उबर नहीं पाया है और 2023 की पहली तिमाही में इस सेगमेंट में सामान्य की तुलना में महज़ 38% की ही बिक्री हो पाई है.
बीते वर्ष में इस सेगमेंट के प्रदर्शन की बात करें, तो 2022 में, देश के टॉप 7 शहरों में बेची गई कुल 3,64,880 रिहायशी संपत्तियों में से लगभग 26% इस सस्ती श्रेणी की थीं. इस साल यानी 2023 की पहली तिमाही में भी इसकी कुल बिक्री हिस्सेदारी में और गिरावट आई है। 2023 की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च के बीच देश के 7 प्रमुख शहरों में बेची गई कुल 1.14 लाख रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में सस्ते घरों की हिस्सेदारी केवल 20% ही रही है. इस साल अब तक इस सेगमेंट में कुल 23,110 यूनिट्स की ही बिक्री हुई है.
यहां ध्यान में रखने वाली बात यह है कि 2023 की पहली तिमाही के इस प्रदर्शन के बाद सस्ते घरों के मार्केट में और भी सुस्ती आने की आशंका जताई जा रही थी. इसकी वजह यह है कि सस्ते घरों का बाजार इस समय छंटनी, संपत्ति की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते बिक्री में सुस्ती जैसी विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रहा है. ऐसे में आरबीआई अगर ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता तो इस सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ जातीं और निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए घर खरीदना और भी मुश्किल हो जाता.
इस लिहाज से दरों में कोई बदलाव न कर के होम लोन की दरों को स्थिर रखने का यह कदम घर खरीदारों और हाउसिंग सेक्टर के कारोबारियों दोनों के लिए ही स्वागत योग्य कदम है.

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