कैसे होती है क्रिप्टो करेंसी की ट्रेडिंग, कहां जमा होती है ये वर्चुअल मुद्रा



क्रिप्‍टो करेंसी में देश के लोगों की रुचि बढ़ती जा रही है। बजट में क्रिप्‍टो करेंसी की बिक्री पर 30 फीसदी कर लगाने की घोषणा से भले ही इसके निवेशकों को झटका लगा है, पर इस घोषणा ने क्रिप्‍टो को एक निवेश विकल्‍प के रूप में लोगों के ज़हन में ला दिया है। इसे लेकर लोगों के मन में जिज्ञासा बढ़ गई है। लोग जानना चाह रहे हैं कि आखिर ये क्रिप्‍टो करेंसी काम कैसे करती है, इस वर्चुअल करेंसी कैसे खरीदा-बेचा जाता है और इसे रखा कहां जाता है। आज हम आपको इसी बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। 

अलग तरह से होती है होल्डिंग

लोगों को यह तो पता है कि नकदी यानी पारंपरिक करेंसी को बैंक खाते में जमा किया जाता है और शेयर को डिजिटल फॉर्मेट में डीमैट खाते में रखा जाता है, मगर क्रिप्टो की होल्डिंग अलग तरह से होती है।

कैसे मिलती है डिलिवरी

क्रिप्टो के लिए क्या है प्रोसेस कोई निवेशक जब क्रिप्टो खरीदता है, तो वो एक्सचेंज, जहां उसका खाता हो, बाजार में निवेशक के ऑर्डर के लिए एक मैच ढूंढता और विक्रेता से क्रिप्टो की डिलीवरी लेता है। आखिर में वहीं निवेशक की तरफ से क्रिप्टो को स्टोर करता है। इस तरह ये शेयर होल्डिंग से अलग है। 

ऐसे खुलता है खाता

क्रिप्‍टो यानी वर्चुअल करेंसी में निवेश करने के लिए आपको किसी क्रिप्टो एक्सचेंज पर खाता खोलना होता है और केवाईसी डिटेल दर्ज करना होता है। फिर जो अकाउंट आपने क्रिप्टो एक्सचेंज पर ट्रेड करने के लिए जोड़ा है उसमें पैसे डाल कर क्रिप्टो करेंसी खरीदी जा सकती है। 


इंस्‍टेंट है खरीद-बिक्री की प्रोसेस

इन प्लेटफॉर्म से कैश निकालना भी एक इंस्टैंट और आसान प्रोसेस होती है। साथ ही पर यह बात भी महत्‍वपूर्ण है कि डीमैट खाता खुलवाने में आपको 2-3 दिन लग सकते हैं और ये एक लंबा प्रोसेस होता है। जबकि क्रिप्टो एक्सचेंज में इतना झमेला नहीं होता। ऐप डाउनलोड, ऑनलाइन केवाईसी करो और निवेश शुरू। क्रिप्टो एक्सचेंज पर तीन जिम्मेदारियां स्टॉक एक्सचेंजों के उलट क्रिप्टो एक्सचेंज निवेशकों के लिए एक्सचेंज, डिपॉजिटरी और ब्रोकर यानी तीन तीन भूमिका निभाते हैं। 

फिलहाल नहीं है कोई नियामक

शेयर मार्केट और क्रिप्‍टो एक्‍सचेंज में एक और बड़ा अंतर यह भी है कि क्रिप्टो एक्सचेंज फिलहाल अनरेगुलेटेड एंटीटीज हैं। यानी जिस तरह शेयर एक्सचेंजों आदि पर सेबी की नजर रहती है, उस तरह क्रिप्टो एक्सचेंज पर कोई रेगुलेटर नहीं है। इस पर किसी भी नियामक संस्‍था का नियंत्रण नहीं है।  

देश में आ चुके हैं कई क्रिप्टो एक्सचेंज

कई क्रिप्टो एक्सचेंज निवेश के लिए उपलब्ध क्रिप्टोकरेंसी में जोखिम शेयर बाजार से अधिक माना जाता है। मगर भारत में इनकी मांग बढ़ी है। इसी मांग को पूरा करने के लिए भारत में कई क्रिप्टो एक्सचेंज आ चुके हैं। मगर इन एक्सचेंजों के पास क्रिप्टो को सोर्स करने या लिक्विडिटी जोखिम को मैनेज करने के लिए कोई एक जैसा तरीका नहीं है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एक ही प्लेटफॉर्म पर क्रिप्टो एक्सचेंज खरीदार/विक्रेता को खोजने की कोशिश करता है। वरना एक्सचेंज क्रिप्टो को बड़े एक्सचेंजों से सोर्स करते हैं यानी उससे लेते या खरीदते हैं।

'प्राइवेट की' के जरिये मिलता है स्‍वमित्‍व

आमतौर पर एक 'प्राइवेट की (चाबी)' का पोजेशन उस क्रिप्टो संपत्ति का स्वामित्व दिलाता है। मगर भारत में एक्सचेंज 'सेंट्रालाइज्ड' हैं। इसका मतलब है कि वे निवेशक की ओर से ये 'की' रखते हैं।


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