- प्रतिनिधित्व के आंकड़े बिना नहीं दिया जा सकता प्रमोशन में SC/ST को आरक्षण : सुप्रीम कोर्ट
पदोन्नति में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के लिए आरक्षण के मामले में आज अहम फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की शर्तों को कम करने से इनकार कर दिया है.
शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बिना आंकड़े के सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में रिजर्वेशन नहीं दिया जा सकता है.
कोर्ट के इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि प्रमोशन में रिजर्वेशन देने से पहले राज्य सरकारों को आंकड़ों के जरिए ये साबित करना होगा कि SC/ST का प्रतिनिधित्व कम है.
कोर्ट ने कहा है कि राज्य SC/ST के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण देने से पहले मात्रात्मक डेटा एकत्र करने के लिए बाध्य है.
यह अहम फैसला सुनाने वाली जस्टिस एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बी आर गवई भी शामिल हैं.
कोर्ट ने कहा है कि नागराज (2006) और जरनैल सिंह (2018) मामले में संविधान पीठ के फैसले के बाद शीर्ष अदालत कोई नया पैमाना नहीं बना सकती.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रतिनिधित्व का एक तय अवधि में मूल्यांकन किया जाना चाहिए. इस मूल्यांकन की अवधि क्या होगी, इसे केंद्र सरकार तय करे.
बता दें कि इस मामले में कोर्ट ने 26 अक्टूबर 2021 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. केंद्र/राज्यों से जुड़े आरक्षण के मामलों में स्पष्टता पर 24 फरवरी से सुनवाई शुरू होगी.
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