दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का एक बड़ा कारण अकसर आसपास के इलाकों में किसानों द्वारा बड़े पैमाने पर पराली जलाने को बताया जाता है.
केंद्र सरकार अब इसका एक ऐसा कारगर समाधान निकालने जा रही है, जिससे खेतों में जलाई जाने वाली पराली अब प्रदूषण नहीं, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाएगी.
सरकार की समर्थ यह योजना किसानों को फसल की पराली को जलाने के बजाय उसे भूसे में बदलने के लिए प्रोत्साहित करने की है, जिसका इस्तेमाल बायोमॉस के रूप में बिजली उत्पादन में किया जाएगा.
जानकार बताते हैं कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने बजट भाषण में बिजली उत्पादन बढ़ाने, प्रदूषण कम करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने से संबंधित एक मिश्रित योजना का उल्लेख कर सकती हैं.
जानकारी के मुताबिक इस योजना को ‘समर्थ’ नाम दिया गया है और इसके तहत थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले से बिजली के उत्पादन में 5 फीसदी बायोमास का इस्तेमाल अनिवार्य किया जा सकता है.
माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम से किसानों को सालाना लगभग 15,000 करोड़ रुपये की आमदनी होगी, क्योंकि बिजली संयंत्रों में इस्तेमाल के लिए बायोमॉस के रूप में किसानों से पराली की खरीदारी पावर प्लांट्स द्वारा की जाएगी.
इस पहल के चलते जब पराली की इस्तेमाल बिजली घरों में होगा तो इससे हर साल दिल्ली-एनसीआर में होने वाला वायु प्रदूषण भी कम होगा. साथ ही बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ेगी. बिजली बनाने में कोयले की मांग कम होगी.
भारत के बिजली प्लांट हर साल लगभग 700 मिलियन टन कोयले (coal) की खपत करते हैं. अलग इसमें 5 फीसदी पराली या अन्य बायोमास का इस्तेमाल होगा तो लगभग 35 मिलियन टन कम कोयला जलाया जाएगा.
बता दें कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली , राजस्थान और मध्य प्रदेश में हर साल बड़े पैमाने पर किसानों द्वारा पराली जलाई जाती है.
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