दिवाली पर पटाखे फोड़कर जश्न मनाने का चलन आम है. ये पटाखे धमाका करके शोर और धुआं पैदा करते हैं. इसके विपरीत एक स्वयंसेवी संस्था ने बाजार में ऐसे ‘सीडबॉल’ पटाखे पेश किए हैं जिनसे फलों व सब्जियों के पौधे निकलते हैं.
सीडबॉल नाम से पेश किए गए न पटाखों को जलाया नहीं बल्कि बोया जाता है. इन पटाखों को पानी में भिगोकर जमीन पर रखा जाता है,
कुछ समय बाद इससे पौधे के अंकुर निकलते हैं, जिसके बाद जरूरत पड़ने पर पानी दिया जाता है, ताकि उसमें से पेड़ या सब्जियां उग सकें.
इन पटाखों में टमाटर, ग्वार, मिर्च और लक्ष्मी बम में आप्टे और भिंडी के बीज शामिल हैं. इसके अलावा, विभिन्न अन्य प्रकार के पटाखों में मूली, ज्वार, पालक, लाल चना, सन, ककड़ी, प्याज और बैंगन शामिल हैं.
पर्यावरण के अनुकूल इन पटाखों को पर्यावरण कार्यकर्ता श्वेता भट्ट ने बनाया है.इन पटाखों की अब बाजार में मांग बढ़ रही है.उनकी इस पहल का नाम ‘सीडबॉल’ है.
श्वेता भट्टड की टीम ने पिछले 10,000 पटाखों के 1,500 सेट बनाए थे। इनमें से 8 सेट पिछले साल बेचे गए थे. सीडबॉल पटाखों के पैकेट की कीमत 299 रुपये से लेकर 860 रुपये तक है.
श्वेता और उनकी टीम महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित परदासिंगा गांव में पर्यावरण की रक्षा के लिए कई तरह की गतिविधियां करती है.
आसपास के सात गांवों की करीब 100 महिलाओं से ज्यादा को ऐसे सीडबॉल बनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है. इससे संबंधित महिलाओं को 250 से 300 रुपये प्रतिदिन का रोजगार मिल रहा है
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