पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव के दौरान सभी उम्मीदवारों ने अपने-अपने हलफनामे में संपत्ति का ब्योरा दिया था। चुनाव के बाद करीब 100 विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने संपत्ति का गलत ब्योरा दे दिया है।
उन्होंने अपनी जितनी संपत्ति की घोषणा कागज पर की है, वास्तव में उससे कहीं ज्यादा संपत्ति के मालिक वे हैं। इनमें सभी दलों के विधायक शामिल हैं।
जीते हुए सभी माननीयों की संपत्तियों की जांच का आदेश चुनाव आयोग ने आयकर विभाग को दिया था। इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार कर चुनाव आयोग को भेजी जाएगी।
जिन 100 विधायकों की संपत्ति इनकी स्वघोषित संपत्ति के मुकाबले गलत पायी गई है, उन्हें आयकर विभाग ने नोटिस भेजा है। उनसे घोषणा पत्र और हकीकत में संपत्ति में अंतर का कारण पूछा गया है।
सभी विधायकों को नवंबर के अंत तक जवाब देने को कहा गया है। हालांकि कुछ विधायकों ने इसके लिए अतिरिक्त समय की मांग भी की है।
समय सीमा बीतने के बाद भी कोई विधायक अपने हलफनामे में गलत तरीके से घोषित संपत्ति का सटीक कारण नहीं बता पाएंगे, तो उनसे पूछताछ भी हो सकती है।
साथ ही इसकी विस्तृत रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंपी जाएगी। उसके बाद चुनाव आयोग से प्राप्त दिशानिर्देश के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
कुछ विधायकों की वास्तविक आय उनकी ओर से घोषित आय से कई गुनी ज्यादा है। फिलहाल ऐसे लोगों की खासतौर से जांच चल रही है।
जिन 100 विधायकों की गलत संपत्ति का ब्योरा पकड़ा गया है, उनके पिछले तीन-चार सालों के आयकर रिटर्न की भी जांच की गई है।
इसमें तुलना करने पर कई स्तर पर गड़बड़ी सामने आयी है। कुछ विधायकों ने तो हलफनामे में कई अचल या चल संपत्तियों का जिक्र ही नहीं किया है।
कुछ ने आयकर रिटर्न में जिन संपत्तियों का उल्लेख किया, उसका जिक्र हलफनामे में नहीं किया है।
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