धान किसान इन बातों का रखें ध्‍यान, वर्ना फसल हो जाएगी बर्बाद



देश के जिन हिस्‍सों में जुलाई के अंत और अगस्‍त में खरीफ सीजन के धान की रोपाई कर दी गई थी, वहां अब पौधों पर बालियां आने का समय हो गया है. ऐसे में किसानों के लिए अपनी फसल को रोगों और कीटों से बचाने के लिए सजग रहने और समय रहते उचित उपाय करने का वक्‍त आ गया है.

इस वक्त धान के पौधों की लंबाई बढ़ रही है. निराई और खाद का छिड़काव का काम पूरा हो चुका है. इस समय पर किसानों को धान के खेत में नाइट्रोजन जरूर देना चाहिए. इससे चावल के दाने अच्‍छे बनते हैं और किसानों को ज्‍यादा फायदा मिलता है.  धान की खेती में नाइट्रोजन का छिड़काव धान में तीन बार किया जाता है. इसमें से दो बार छिड़काव अबतक किया जा चुका होगा. तीसरा और अंतिम चरण का काम बालियां बनने के समय ही कर देना चाहिए.

किसानों को एक और बात का ध्यान रखना है कि बालियां आने के बाद खेत में पानी की कमी न होने दें. इससे बालियों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है.  
इसके अलावा खेत में खर-पतवार का नियंत्रण भी इस समय बहुत जरूरी है, ताकि धान के पौधों को दिया जाने वाला पोषण ये अवाछित पौधे न चूस जाएं. 

इस वक्‍त खरपतवार का सबसे कारगर उपाय समय-समय पर निराई करते रहना ही होता है. इसलिए खेत में जो भी खरपतवार रह गए हैं तो उन्हें निकाल दें.  
इस वक्त रासायनिक विधि का असर इन खर-पतवारों पर नहीं होगा. शुरुआत में यानी 30-35 दिनों तक रसायन के छिड़काव से खर-पतवार पर नियंत्रण किया जा सकता है, लेकिन इस अवस्था में ऐसा मुमकिन नहीं है.

किसानों को धान की फसल को नष्ट करने वाली ब्राउन प्लांट हॉपर के आक्रमण से भी आगाह किया है. यह कीट धान की पत्तियों से रस चूसकर फसल को भारी क्षति पहुंचाते हैं.  
इसलिए पौध के निचली भाग पर अगर मच्छरनुमा कीट दिख रहे हैं तो उसका समाधान करें वरना पूरी मेहनत पर पानी फिर जाएगा.

इस कीट पर नियंत्रण पाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सलाह दी जाती है कि पैनीसीलियम फीलीपेंसिस या फिर मेटाराइजियम का खेत में छिड़काव कर दें.

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