इसमें कोविशील्ड के डोज की कीमत 215 रुपये और कोवैक्सिन 225 की रुपये रखी गई है. टीकों की आपूर्ति अगस्त और दिसंबर 2021 के बीच की जानी है. इसके अलावा, सरकार ने अपने कोविड-19 वैक्सीन की 30 करोड़ खुराक आरक्षित करने के लिए अग्रिम भुगतान भी किया है, ताकि टीकाकरण अभियान रफ्तार बढ़ाई जा सके. मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक सरकार 31 जुलाई तक 50 करोड़ खुराक के लक्ष्य को हासिल करने की राह पर है, जो साल के अंत तक लक्ष्य कवरेज को पूरा करने के लिए जरूरी है.
केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2021 तक अपनी पूरी वयस्क आबादी को टीका लगाने की योजना बनाई है. 16 जुलाई को रात 10 बजे तक पूरे भारत में कोविड-19 टीकों की करीब 40 करोड़ खुराकें दी जा चुकी थीं. सरकार ने पहले घोषणा की थी कि 21 जून से नई खरीद योजना के तहत टीकों की खरीद कीमतों में बदलाव किया जाएगा. दरों में बढ़ोतरी की वजह यह है कि वैक्सीन निर्माताओं ने सरकार से कहा था कि उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए 150 रुपये प्रति डोज की पुरानी दर पर वैक्सीन की आपूर्ति कर पाना उनके लिए संभव नहीं होगा.
सरकार ने अब तक 40.31 करोड़ से अधिक खुराकों की खरीद की है. शुरुआती ऑर्डर में कोवैक्सिन की कीमत 295 रुपये और कोविशील्ड की 200 रुपये प्रति खुराक थी. इसके बाद इसे घटाकर 150 रुपये प्रति खुराक कर दिया गया था. राज्य सरकारें मई में कोवैक्सिन के लिए 400 रुपये प्रति खुराक और कोविशील्ड की खुराक के लिए 300 रुपये खर्च कर रही थीं. वर्तमान में वैक्सीन निर्माता अपने कुल उत्पादन का केवल 25% निजी क्षेत्र को सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों पर बेच सकते हैं.
निजी क्षेत्र के लिए कोविशील्ड की निर्धारित कीमत 780 रुपये, कोवैक्सिन की 1,410 रुपये और स्पुतनिक वी की 1,415 रुपये है, जिसमें जीएसटी शामिल नहीं है. वैक्सीन लगाने के लिए अस्पतालों द्वारा अधिकतम 150 रुपये का सेवा शुल्क लिया जा सकता है.

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