रोजाना की डाइट में शामिल करें मोटे अनाज, सुधरेगी सेहत


बहुत समय पहले लगभग 4500 ईसा पूर्व भारत में सबसे ज्यादा खेती की जाने वाली फसलें जैसे कोदो, बरनी, जौ, ज्‍वार और बाजरा जैसे मोटे अनाजों की ही थीं। 

बाजरा के फायदों का उल्लेख यजुर्वेद के कुछ प्राचीन ग्रंथों में किया गया है। 50 साल पहले तक भी भारत में बाजरा एक प्रमुख फसल थी और रोजाना के खाने का हिस्सा थी।

हालांकि, आजादी के बाद, गरीबी और कमजोर अर्थव्यवस्था के कारण, भारत चावल और गेहूं जैसे अन्य अनाजों को ज्यादा इस्तेमाल करने लगा। 

हरित क्रांति और सरकारी नीतियों के नतीजन, चावल और गेहूं जैसे पारंपरिक अनाज सस्ते और ज्यादा उपलब्ध हो गए। इस तरह बाजरा को लोग भूल गए। 

बाजरे को लेकर गलत धारणा है कि वे सिर्फ कार्बोहाइड्रेट से बने होते हैं, जिससे सिर्फ वजन बढ़ेगा। वजन सिर्फ कार्बोहाइड्रेट से ही नहीं बल्कि गलत लाइफस्टाइल, रिफाइंड शुगर और फैट फ़ूड खाने से बढ़ता है।

हालांकि आज की कोविड की दुनिया में यह अनाज फिर से वापसी कर रहा है। बाजरा पोषक तत्वों और खनिजों से भरा होता है। कम GI ग्रेन होने के कारण इसके और भी कई फायदे हैं। 

बाजरा में उच्च मात्रा में फाइबर मौजूद होता है, जो सूजन और कब्ज जैसी परेशानियों से निपटने में मदद करता है। लिग्नान जैसे प्रीबायोटिक फाइबर आंत को स्वस्थ रखती है।

दो कप सफेद चावल के मुकाबले एक कप बाजरा वजन घटाने के लिए एक बेहतर विकल्प है। बाजरा क्वेरसेटिन और कैटेचिन जैसे एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होते हैं।

फ्री रेडिकल को बेअसर करता है, और किडनी और लिवर से टॉक्सिन पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता हैं।

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