देश के हुए लोकसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार तीसरे कार्यकाल की राह खुलने के बाद जापान के दिग्गज बैंक नोमुरा ने भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर एक रिपार्ट जारी की है।
नोमुरा ने अपने इस आकलन में कहा है कि "हमारा आकलन है कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है. भारत में सुधार आम तौर पर राजनीति की कसौटी पर खरे उतरे हैं और हम उम्मीद करते हैं कि सरकार शासन और प्रशासनिक सुधारों की गति को जारी रखेगी. राज्यों को भूमि और श्रम से जुड़े अधिक कठिन सुधारों पर काम करने की ज्यादा छूट मिलेगी."
नोमुरा ने कहा भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है.चुनाव आयोग ने सभी 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम घोषित कर दिए हैं, जिसमें भाजपा ने 240 सीटें और कांग्रेस ने 99 सीटें जीती हैं. इसे देखते हुए नोमुरा का कहना है कि भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को लोकसभा में बहुमत मिला है. ऐसे में मोदी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रहे हैं। हालांकि हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा है, जिसे उनकी लोकप्रियता में कमी के तौर पर देखा जा रहा है.
हालांकि राजनीतिक पृष्ठभूमि में बदलाव होने के कारण निकट अवधि में अनिश्चितता अधिक है, लेकिन सुधारों और अर्थव्यवस्था की दिशा में बदलाव नहीं आता दिख रहा है.
नोमुरा ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि फिलहाल सारा ध्यान सरकार गठन पर है. इसे लेकर पार्टियों के बीच राजनीतिक संवाद भी जारी है. इस सबके बीच नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 9 जून को होने की संभावना है.
निवेश बैंक ने कहा कि हमारा मानना है कि मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरे शामिल हो सकते हैं. नीतियों की दिशा का आकलन करने के लिए हमारा ध्यान नई सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले यूनियन बजट पर होगा, जो संभवतः जुलाई की शुरुआत में पेश किया जाएगा.
बैंक ने उम्मीद जताई कि केंद्र की नई सरकार का पहला 125-दिवसीय एजेंडा संभवतः डिजिटलीकरण, बुनियादी ढांचे, औद्योगिकीकरण और शासन-संबंधी सुधारों पर केंद्रित होगा.
चुनाव के नतीजों के फल स्वरूप रिवेन्यू के मुकाबले पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. हालांकि, इससे मैक्रो स्तर पर फिलहाल कोई बड़ा बदलाव आने की संभावना नहीं दिखती है.
नोमुरा ने कहा है, "हमें अंतरिम बजट में जीडीपी के 5.1 फीसदी के लक्ष्य में किसी तरह की कमी की उम्मीद नहीं है, लेकिन अगर राजनीतिक विवशताओं के चलते सरकार महंगाई बढ़ाने वाली नीतियों की ओर कदम बढ़ाती है, तो इससे आर्थिक कंसोलिडेशन में सुस्ती आ सकती है." नोमुरा ने आर्थिक सुधार जारी रहने की संभावना जताई है, जबकि बाजार में सुधार मुश्किल बने रहेंगे. मौद्रिक नीति पर किसी तरह के असर की उम्मीद नहीं है.

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