Covishield Vaccine के Side Effects की याचिका पर Supreme Court करेगा सुनवाई


'न खाऊंगा, न खाने दूंगा' का नारा बुलंद करने वाले पीएम नरेंद्र मोदी के लिए अब अपना ये जुमला गले की हड्डी बनता जा रहा है। Electoral bond के जरिये 'चंदाचोरी' की कलई खुलने के बाद अब Covishield Vaccine के Side Effects पर मोदी सरकार की परेशानी बढ़ने वाली है। 


इस मामले में एक बहुत बड़ी खबर यह आई है कि देश की सर्वोच्‍च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।अपने कई बड़े और बोल्‍ड फैसलों के लिए जाने जाने वाले CJI  DY Chandrachud ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया है। हालांकि अभी इस मामले की सुनवाई की तारीख तय नहीं की गई है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि Electoral bond की तरह ही कोर्ट इस मामले में भी कोई ऐसा फैसला दे सकता है, जिससे मोदी सरकार की भारी किरकिरी हो सकती है। 


दरअसल Covishield Vaccine बनाने वाली कंपनी AstraZeneca द्वारा ब्रिटेन की अदालत में वैक्‍सीन के गंभीर साइड इफेक्‍ट होने की बात स्‍वीकार किए जाने के बाद एक भारतीय वकील ने सुप्रीम कोर्ट में इस बारे में याचिका दायर कर दी है। विशाल तिवारी नाम के शख्स, जोकि पेशे से वकील हैं ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कोविशील्ड वैक्सीन के Side Effects और जोखिम की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में सीनियर डॉक्‍टर्स के एक पैनल का गठन करने की मांग की गई है। 


उन्‍होंने इसे देश की जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा बेहद अहम मुद्दा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में जांच के साथ ही वैक्सीन के दुष्प्रभावों और इसके जोखिमों के प्रति लोगों को सचेत करने के लिए सरकार को जरूरी कदम उठाने का आदेश देने की मांग भी की है।


साथ ही याचिका कर्ता ने Covishield वैक्सीन से लोगों को हुए नुकसान की जिम्‍मेदारी तय करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है। इसके अलावा याचिका में ये भी कहा गया है कि जो लोग इस वैक्सीन को लगाने की वजह से अक्षम हो गए हैं या जिनकी मौत हो गई है सरकार की ओर से उन्हें मुआवजा देने का आदेश भी जारी किया जाए।



याचिका में कहा गया कि वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका ने कोर्ट में माना है कि उसकी कोविड-19 वैक्सीन AZD1222 प्लेटलेट काउंट कम करने, खून के थक्कों के जमाने और कुछ मामलों में हार्ट अटैक तक का कारण बन सकती है। एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा संयुक्त रूप से विकसित इसी वैक्सीन को भारत में कोविशील्ड के रूप में लाइसेंस के तहत बनाया गया था। भारत में इसका उत्‍पादन और वितरण सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया नाम की कंपनी ने किया था, जिसके प्रमुख अदार पूनावाला हैं। 


बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अदार पूनावाला के देश छोड़कर ब्रिटेन चले जाने की खबरें भी आई थीं। उस समय उन्‍होंने अपने ऊपर काफी प्रेशर होने की बात कही थी। ऐसे में अब माना जा रहा है कि उन्‍हें वैक्‍सीन के साइड इफेक्‍ट्स के बारे में उस समय ही पता चल गया था, पर उनपर मुंह बंद रखने का दबाव डाला जा रहा था, जिससे परेशान होकर पूनावाला विदेश भाग गए थे। 


हालांकि, उनके इस पलायन पर देश में हल्‍ला मचने के बाद उन्‍हें जैसे-तैसे भारत वापस आने के लिए राज़ी कर लिया गया था. क्‍योंकि पूनावाला के देश छोड़ने से वैक्‍सीन में कुछ झोल होने की चर्चाएं ज़ोर पकड़ने लगी थीं, जो अब एस्‍ट्रोजेनिका की स्‍वीकारोक्ति के बाद सही साबित हो गई हैं। 


बता दें कि Vaccine के Side Effects को लेकर एस्ट्राजेनेका को ब्रिटेन में कई मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। टीके के कारण हुई मौतें और गंभीर समस्‍याओं को लेकर कोर्ट में 51 मामलों में पीड़ित 100 मिलियन पाउंड तक के हर्जाने की मांग कर रहे हैं।


इधर, सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में भी कहा गया है कि भारत में कोविशील्ड की 175 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं। जिसके बाद दिल का दौरा पड़ने और अचानक बेहोश होने से मौतों के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है। युवाओं और बच्‍चों तक को दिल का दौरा पड़ने के कई मामले सामने आए हैं। इसलिए कोविशील्‍ड वैक्‍सीन के साइड इफेक्‍ट्स की जांच करना बेहद जरूरी है। 


देखना है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कब शुरू करता है और इसका फैसला कब और क्‍या आता है। अगर यह सबकुछ अगले 15-20 दिनों में यानी लोकसभा चुनाव के बीच चालू हो जाता है। तो निश्चित तौर पर इसका असर आम चुनाव के नतीजों पर भी कहीं न कहीं देखने को मिल सकता है।



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