जोसेफ लोबो की छत पर बने टेरेस गार्डन में लहलहाते ढेर सारे पौधों में से मियाज़ाकी आम का एक पौधा लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. हो भी क्यों ना? इस एक पौधे ने उन्हें पूरे 3 लाख रुपये कमा कर जो दिए हैं.
यूं तो गर्मी के सीजन में हमारे देश में आम 40 से 50 रुपये किलो तक में मिल जाता है, पर मियाजाकी बेहद वीआईपी किस्म का आम है. इसकी कीमत आमतौर पर 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है. इस तरह एक आम की कीमत लगभग 10,000 रुपये तक बैठती है.
इन आमों की खेती करने का प्रयास लोबो लोबो ने तकरीबन साल भर पहले 2023 में शुरू किया, पर शुरू में इन्हें कामयाबी नहीं मिली. प्रतिकूल मौसम के कारण पहले साल इन्हें एक भी आम नहीं मिला. हालांकि, शुरुआती असफलता से परेशान हुए बिना लोबो डटे रहे और इस साल उनकी मेहनत पौधे में फलों के रूप में रंग लाई .
मियाजाकी आमों के अलावा उनके टेरेस गार्डन में और भी कई दुर्लभ और विदेशी फलों के पेड़ पौधे लगे हुए हैं. इनमें सफेद जावा प्लम, ब्राजीलियाई चेरी, एक दुर्लभ ताइवानी नारंगी नस्ल और मशहूर शंकरपुरा चमेली शामिल है.
इनकी इस छोटी सी बगिया की विविधता यहीं खत्म नहीं होती. लोबो के इस गार्डन में हर मौसम के आम, सात प्रकार की चेरी, सफेद बैंगनी, बीज रहित नींबू जैसे फल और सब्जियां शामिल हैं. औषधीय पौधों और सब्जियों में उनकी रुचि ने ही इस सुंदर बगीचे को सजाया है. इसके अलावा लोबो मधुमक्खी पालन भी करते हैं, जो न केवल इन पौधों के परागण में मददगार साबित होता है, बल्कि उनके पौधों को सेहतमंद भी बनाए रखता है.
उन्हें कर्नाटक में हाइड्रोपोनिक तकनीक का इस्तेमाल करके चमेली की खेती करने वाले पहले हाइड्रोपोनिक किसान के रूप में जाना जाता है. खेती की इस मिट्टी रहित तकनीक में पोषक तत्वों से भरपूर पानी में पौधे उगाए जाते हैं. इसके जरिये ही उन्होंने अपने घर की छत पर बेहतरीन क्वालिटी की इस चमेली सहित कई दुर्लभ पौधों की बागवानी कर रखी है.
लगातार की गई अपनी कोशिशों और सुधारों के जरिये लोबो अपनी कृषि विशेषज्ञता बागवानी से भी आगे ले जा चुके हैं. उनकी विविधता भरी कृषि गतिविधियों में डेयरी फार्मिंग और शहद उत्पादन भी शामिल है. उनके छत के बगीचे में रुद्राक्ष, कपूर, खजूर, केला और काली मिर्च जैसे पौधों की एक विविधता भरी रेंज शामिल है और इन सबके बीच कीमती मियाजाकी आम लोबो के बगीचे का सिर मौर बना हुआ है.
अपने बेहद खास स्वाद और औषधीय गुणों के लिए दुनिया भर में मशहूर इन आमों की काफी ज्यादा मांग है. लोबो ने बताया कि भारत में कई किसानों ने मियाजाकी आमों की ऊंची कीमतें से आकर्षित होकर उनकी खेती करने की कोशिश की है. वह कहते हैं कि इसका असाधारण स्वाद और इससे मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ इसकी प्रीमियम कीमत को जस्टिफाई करते हैं.

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