इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये चंदा चोरी के खुलासे के बाद मोदी सरकार की एक और खतरनाक कारगुजारी सामने आई है। इस बार मामला उससे भी कहीं ज्यादा गंभीर है। मामला देश के करोड़ों लोगों की सेहत और जान के जोखिम से जुड़ा हुआ है।
मामला यह है कि कोविड-19 की जिस कोविशील्ड वैक्सीन को भारतीय कंपनी सीरम इस्टीट्यूट द्वारा विकसित बता कर मोदी सरकार ने देश के करोड़ों लोगों को लगवाया उसे दरअसल ब्रिटेन की कंपनी एस्ट्राजेनेका ने तैयार किया था और कंपनी ने अब ब्रिटेन की अदालत में स्वीकार किया है कि उसकी वैक्सीन से शरीर में खून के थक्के जमने, ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसे गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं।
ब्रिटेन में कंपनी के इस कुबूलनामे के बाद मोदी सरकार इस बात को लेकर गंभीर आरोपों में घिर गई है कि उसने प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए और नियमों में ढील देकर इस वैक्सीन को मंजूरी कैसे दे दी और गंभीर साइड इफेक्ट का पर्याप्त अध्ययन किए बिना ही सरकार के द्वारा इस वैक्सीन को देश के करोड़ों लोगों को क्यों लगवाया गया।
वैक्सीन बनाने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका ने कोर्ट में माना है कि कोविड-19 की उसकी वैक्सीन से टीटीएस जैसे गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं। टीटीएस को मेडिकल की भाषा में थ्रोम्बोसइटोपेनिया सिंड्रोम कहा जाता है, जो शरीर में खून के थक्के जमने की वजह बनती है। इससे स्ट्रोक, हृदय गति थमने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
एस्ट्राजेनेका ने माना है कि उसका कोविड-19 वैक्सीन का जो फॉर्मूला था उसी से भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ने कोवीशील्ड नाम से वैक्सीन बनाई है, जिासे खतरनाक साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। हालांकि, वैक्सीन में किस चीज की वजह से यह बीमारी होती है, इसकी जानकारी फिलहाल कंपनी के पास नहीं है।
ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एस्ट्राजेनेका पर आरोप है कि उनकी वैक्सीन से कई लोगों की मौत हो गई। वहीं कई अन्य को गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ा। कंपनी के खिलाफ हाईकोर्ट में 51 केस चल रहे हैं। पीड़ितों ने एस्ट्राजेनेका से करीब 1 हजार करोड़ का हर्जाना मांगा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक वैक्सीन लगवाने के बाद अप्रैल 2021 में जेमी स्कॉट नाम के शख्स की हालत खराब हो गई। शरीर में खून के थक्के बनने का सीधा असर उनके दिमाग पर पड़ा और ब्रेन में इंटर्नल ब्लीडिंग हो गई, जिसके चलते डॉक्टरों ने उनकी पत्नी से कहा कि वो स्कॉट को नहीं बचा पाएंगे।
पिछले साल स्कॉट ने एस्ट्राजेनेका के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। मई 2023 में स्कॉट के आरोपों के जवाब में कंपनी ने दावा किया था कि उनकी वैक्सीन से TTS नहीं हो सकता है। हालांकि इस साल फरवरी में हाईकोर्ट में जमा किए कानून दस्तावेजों में कंपनी इस दावे से पलट गई।
इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद स्कॉट के वकील ने कोर्ट में दावा किया है कि एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन में खामियां हैं और इसके असर को लेकर गलत जानकारी दी गई।

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