सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय से जुड़े एक मामले में मोदी सरकार को तगड़ी फटकार लगाते हुए उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना ठोंका है। कोर्ट ने केंद्र सरकार की तरफ से मेघालय हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करार देते हुए केंद्र सरकार को जमकर लताड़ा है।
मेघालय हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने सुप्रीम कोर्ट पहुंची केंद्र सरकार को अदालत की नाराजगी का सामना करना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि मेघालय हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने का कोई औचित्य ही नहीं है। कोर्ट में दो जजों की खंडपीठ ने केंद्र सरकार के रवैये पर तगड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने का फैसला कानूनी प्रक्रिया का सरासर दुरुपयोग है।
जस्टिस विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मोदी सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए केंद्र सरकार को पांच लाख रुपये जुर्माना भरने का आदेश भी सुनाया। अदालत ने कहा, याचिकाकर्ताओं यानी केंद्र सरकार को चेतावनी दी जाती है कि वे भविष्य में ऐसी तुच्छ याचिकाएं दायर न करें।
पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से दाखिल की गई विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज किया जाता है। हम हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि हाईकोर्ट के समक्ष केंद्र सरकार के वकील ने कहा था कि मामला पूरी तरह से अदालत के पिछले फैसले से कवर होता है। इसके बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील के बयान के आधार पर मामले का निपटारा कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। मेघालय हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के फैसले को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील पर गौर करने के बाद मामले का निपटारा कर दिया कि इसी तरह की याचिका पहले खारिज की जा चुकी है।
पीठ ने कहा कि हम याचिकाकर्ताओं पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाते हैं। जुर्माने की रकम आठ सप्ताह के भीतर सशस्त्र बल युद्ध हताहत कल्याण कोष, केनरा बैंक में जमा करनी होगी। रक्षा मुख्यालय शाखा साउथ ब्लॉक में इस राशि को जमा किया जाएगा। उक्त राशि को उपरोक्त निधि में जमा करने के बाद याचिकाकर्ताओं को उसके बाद एक सप्ताह के भीतर इस अदालत की रजिस्ट्री में पैसा जमा किए जाने का प्रमाण दाखिल करना होगा।
Supreme Court imposed a fine of Rs 5 lakh on Modi government

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