चुनावी बॉन्ड यानी Electoral Bond के राज छुपाने की SBI की चाल सुप्रीम कोर्ट ने फेल कर दी है। कोर्ट ने SBI को जमकर फटकार लगाते हुए कल तक चुनावी बॉन्ड की सारी जानकारी देने को कहा है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने जानकारी देने के लिए समय विस्तार की मांग कर रही याचिका को भी खारिज कर दिया है। पांच सदस्यीय बेंच का कहना है कि एसबीआई मंगलवार तक इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी भारत निर्वाचन (ECI) दे।
इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी SBI को कड़ा आदेश देने के साथ ही चुनाव आयोग को शुक्रवार शाम 5 बजे तक जानकारियां प्रकाशित करने के भी आदेश दिए।
साथ ही अदालत ने बैंक को चेतावनी भी दी है कि अगर कल तक जानकारी नहीं दी गई, तो अवमानना की कार्यवाही की जाएगी। ECI को देने के लिए SBI ने 30 जून तक का समय मांगा था।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। बेंच में जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं।
बैंक तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे ने कोर्ट को बताया है कि बैंक को जानकारी जुटाने के लिए और समय की जरूरत है। उन्होंने इसके लिए मामले की संवेदनशीलता का हवाला दिया और पूरी प्रक्रिया में नाम नहीं होने की बात कही। उन्होंने बताया कि डोनर की जानकारी को बैंक की तय शाखाओं में सील बंद लिफाफे में रखा जाता है।
उन्होंने कहा, 'हमें आदेश का पालन करने के लिए थोड़ा और समय चाहिए। हम जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं और हमें इसके लिए पूरी प्रक्रिया को रिवर्स करना पड़ रहा है। एक बैंक के तौर पर हमें इस प्रक्रिया को गुप्त रखने के लिए कहा गया था।'
इसपर सीजेआई चंद्रचूड़ ने एसबीआई पर सवाल उठाए और कहा, 'आप कह रहे हैं कि जानकारियों को सीलबंद लिफाफे में रखा गया और मुंबई ब्रांच में जमा कराया गया है। हमारे निर्देश जानकारियों का मिलान करने के लिए नहीं थे। हम चाहते थे कि SBI दानदाताओं की जानकारी सामने रखे। आप आदेश का पालन क्यों नहीं कर रहे हैं?'
30 जून तक का समय मांगने पर शीर्ष न्यायालय ने एसबीआई को फटकार लगाई। अदालत ने कहा, 'बीते 26 दिनों में आपने क्या कदम उठाए हैं? आपके आवेदन में इसपर कुछ नहीं कहा गया है।' सालवे ने जवाब दिया कि इस काम में तीन महीनों का समय लगता है। उन्होंने कहा, 'मैं गलती नहीं कर सकता, नहीं तो दानदाता मुझपर केसकर देंगे।'
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक करार देते हुए पर तत्काल प्रभाव से इस स्कीम पर रोक लगा दी थी। साथ ही बॉन्ड जारी करने वाले एसबीआई से इसकी सारी जानकारी चुनाव आयोग को देने को कहा था, ताकि देश की जनता को पता चल सके कि राजनीतिक पार्टियों को किससे कितना चंदा मिला है।

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