अयोध्या के विकास के नाम पर जमकर धांधली का खेल खेला जा रहा है। इसका खुलासा बीते दिनों भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक यानी CAG की ही एक रिपोर्ट में हुआ है।
अयोध्या में तो स्थानीय बीजेपी नेताओं द्वारा जमीनो की लूट तो मची हुई है लेकिन वही विकास के नाम पर अपने कृपापात्र ठेकेदारों को उपकृत किए जाने का भी गंदा खेल भी चल रहा है
CAG की यह रिपोर्ट 9 अगस्त को लोकसभा में पेश की गई थी, जिससे छनकर कई बातें अब सामने आ रही हैं। रिपोर्ट में दिए गए विवरणों से पता चलता है कि अयोध्या में डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में जमकर धांधली हुई है। अफसरों और ठेकेदारों की मिली भगत से करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे किए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक CAG ने स्वदेश दर्शन योजना के तहत उत्तर प्रदेश में अयोध्या विकास परियोजना के कार्यान्वयन में कई गड़बडि़यां पाई हैं। इसमें विकास कार्यों के नाम पर जम कर सरकारी धन का दुरुपयोग और धांधली हुई है।
दरअसल, अयोध्या विकास परियोजना स्वदेश दर्शन योजना के तहत बनाए जा रहे रामायण सर्किट का हिस्सा है। केन्द्र की मोदी सरकार ने इसे 27 सितंबर, 2017 को 127.21 करोड़ रुपए की लागत से मंजूरी दी थी, जिसमें से 115.46 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं।
न्यूज पोर्टल truejournalist.com ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है किसीएजी की । 208 पन्नों की रिपोर्ट में 18 जगह अयोध्या का जिक्र किया गया है। CAG रिपोर्ट के मुताबिक अयोध्या विकास परियोजना के कार्यान्वयन में ठेकेदारों को अनुचित लाभ देने समेत कई अनियमितताएं पाई गई हैं।
सीएजी ने स्वदेश दर्शन योजना की शुरुआत जनवरी 2015 से लेकर मार्च 2022 तक के परफॉरमेंस को ऑडिट किया है। इस पर लोकसभा में पेश की गई परफॉरमेंस ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार ठेकेदारों को 19.73 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ दिया गया है.
उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम की ओर से नियुक्त किए गए ठेकेदार को पांच प्रतिशत की दर से परफॉरमेंस गारंटी जमा करनी जरूरी थी। इसके अनुसार अनुबंध राशि 62.17 करोड़ रुपये का 5 प्रतिशत कुल 3.11 करोड़ रुपये हुआ।
ठेकेदार ने इसके नवीनीकरण (सितंबर 2021) के समय रिकॉर्ड पर कोई कारण बताए बिना ही परफॉर्मेंस गारंटी की राशि काफी कम जमा की थी। CAG की रिपोर्ट में बताया गया है कि ठेकेदार ने केवल 1.86 करोड़ रुपये जमा किए थे।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अयोध्या के गुप्तार घाट पर काम को समान आकार के 14 लॉट में बांटा गया था, जिसका काम अलग-अलग निजी ठेकेदारों को सौंप दिया गया था. रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि कार्य निष्पादन एजेंसी (सिंचाई विभाग) ने ठेकेदारों की ओर से प्रस्तावित वित्तीय बोलियों/दरों का तुलनात्मक विश्लेषण करने में सावधानी नहीं बरती. एक जैसी प्रकृति और स्वीकृत लागत के काम एक ही ठेकेदारों को दे दिए, जिसके कारण 19.13 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि गुप्तार घाट में वृक्षारोपण कार्य के लिए 37.70 लाख की राशि के 900 ट्री गार्ड खरीदे गए. लेकिन जनवरी 2022 में किए गए सर्वेक्षण के दौरान ये खुले क्षेत्र में अनुपयोगी पाए गए.
इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया कि तीन ठेकेदारों को काम देने के बाद राज्य सरकार ने स्वत: संज्ञान के आधार पर उनका जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था। ऐसे में वो अब रजिस्टर्ड ठेकेदार नहीं थे, लेकिन एक ठेकेदार को उसके जीएसटी पंजीकरण के संदर्भ में कुल 19.57 लाख रुपये का अनियमित भुगतान कर दिया गया।
इस तरह CAG की रिपोर्ट के मुताबिक स्वदेश दर्शन योजना के लिए कुल आवंटित 115 करोड़ की रकम में लगभग 20 करोड़ तो घोटाले की भेंट चढ़ चुके हैं। कैग की इस रिपोर्ट में उजागर घपले के मामले में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गेंद को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के पाले में डाल दिया।

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