एमएसपी की गारंटी समेत विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली बॉर्डर पर चल रहा किसानों का शांतिपूर्ण आंदोलन एक बार फिर तेजी पकड़ने जा रहा है। एक ओर भारतीय किसान यूनियन निहत्थे किसानों के खिलाफ मोदी सरकार द्वारा सैन्य स्तर के हथियार इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वहीं दूसरी ओर लोकप्रिय अभिनेता नाना पाटेकर खुल कर किसानों के पक्ष में आ गए हैं।
अपने खरे बयानों और बेबाक बोल के लिए मशहूर नाना ने किसानों का आह्वान करते हुए कहा है कि वे अच्छे दिनों का इंतजार करने के बजाय अभी से यह तय कर लें आगे किसकी सरकार लेकर आनी है। इनाना ने किसानों को आत्महत्या करने से भी रोका है।
पॉलिटिकल पार्टीज पर तंज कसते हुए नाना ने कहा, 'किसानों को अब अच्छे समय का इंतजार नहीं करना चाहिए। अब यह देखो कि किस सरकार को लेकर लाना है।' नाना ने कहा, जब सोने के रेट बढ़ते हैं तो चांवल के रेट क्यों नहीं बढ़ते। किसान पूरे देश को खाना देते हैं, लेकिन सरकार के पास किसानों की दिक्कत ठीक करने का समय नहीं है। ऐसी सरकार से किसानों को कुछ नहीं मांगना चाहिए।
नाना नाम फाउंडेशन चलाते हैं जो महाराष्ट्र में सूखे से परेशान किसानों की मदद करते हैं। पॉलिकिल पार्टीज पर तंज कसते हुए नाना ने कहा, 'आप यंग जनरेशन पर क्या असर डाल रहे हो। क्या कर रहे हो आप। मैं पॉलिटिक्स नहीं ज्वाइन कर सकता क्योंकि मैं बहुत स्पष्टवादी हूं।'
उधर, पंजाब में किसान आंदोलन में प्रदर्शनकारी किसानों के जीवन और उनकी संपत्तियों के हुए नुकसान के आकलन के लिए भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।
इसमें मांग की गई है कि 21 फरवरी को पंजाब-हरियाणा सीमाओं पर प्रदर्शनकारी किसानों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए न्यायिक जांच की जाए। याचिका में कहा गया कि निहत्थे किसानों पर सेना स्तर के हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। इसमें कई किसानों की जान चली गई थी और 250 से अधिक किसान घायल हुए थे।
जनहित याचिका में बताया गया है कि हरियाणा सरकार के आदेश पर हरियाणा पुलिस व सीआरपीएफ ने पंजाब के क्षेत्र में घुसकर प्रदर्शनकारी किसानों पर हिंसक कार्रवाई की गई थी। इसमें कई किसानों की जान चली गई थी और 250 से अधिक किसान घायल हो गए।
पैलेट गन के इस्तेमाल के कारण कई किसानों ने अपने अंग खो दिए। अंधाधुंध गोलीबारी के कारण किसानों की जान और संपत्ति जैसे ट्रैक्टर ट्रॉली, कार, मोटरसाइकिल और अन्य मोटर वाहनों को भी भारी नुकसान हुआ। किसान अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते थे और इन निहत्थे किसानों पर अंधाधुंध फायरिंग की गई।
आंदोलनरत निहत्थे किसानों के खिलाफ हरियाणा की खट्टर सरकार की पुलिस के इन हिंसक कृत्यों की जिम्मेदारी तय करने के लिए उच्च न्यायालय के मौजूदा या सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र आयोग गठित करने का निर्देश जारी करने की अपील की गई है।

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