चीन की खतरनाक साजिश का हुआ खुलासा, इस तरह सुरक्षा में लगाई सेंध !


चीन की एक साइबर सिक्योरिटी कंपनी का डेटा ऑनलाइन लीक होने से हड़कंप मच गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चीनी  साइबर सिक्योरिटी कंपनी के डेटा से पता चला है कि चीन के इस हैकर ग्रुप ने भारत सरकार के महत्वपूर्ण  विभागों और देश की कई बड़ी कंपनियों के खुफिया  दस्तावेजों को हैक कर लिया है। 

इनमें प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज और एयर इंडिया एयरलाइन जैसी कंपनियां भी शामिल हैं। हैक हुए डेटा की समीक्षा की जा रही है। चीन सरकार से जुड़े हुए हैकिंग ग्रुप iSoon ने हाल ही में हजारों दस्तावेज, तस्वीरें और चैट मैसेज गिटहब पर पोस्ट किए हैं, जिससे इसकी जानकारी मिली है। 

आई सून (I-Soon) नाम की कंपनी के इन दस्तावेजों से कई सनसनीखेज जानकारियां सामने आईं। इन दस्तावेजों के अनुसार इस कंपनी ने न सिर्फ चीनी लोगों की  बल्कि कई देशों जैसे भारत, नाइजीरिया, इंडोनेशिया और ब्रिटेन की सरकारों के नेटवर्क में भी सेंध लगाई। 

लीक हुए डेटा से पता चला है कि वित्त मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय जैसे महत्‍वपूर्ण विभाग टारगेट पर थे। मई 2021 से अक्टूबर 2021 के बीच भारत और चीन सीमा पर तनाव चरम पर होने के दौरान 'प्रेजिडेंशियल मिनिस्ट्री ऑफ इंटीरियर' के विभिन्न कार्यालयों से जुड़ा 5.49जीबी डेटा हैकर ग्रुप के हाथ लगा।

आई-सून एक टेक कंपनी है। ये चीन के सरकारी प्रोजेक्ट के ठेके लेती है।  इस हैकिंग ग्रुप के दो कर्मचारियों ने बताया कि iSoon और चीन पुलिस ने जांच शुरू कर दी है कि आखिर ये फाइलें लीक कैसे हुईं। एक कर्मचारी ने बताया कि इस लीक मामले को लेकर 21 फरवरी को iSoon की एक मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में बताया गया था कि इस घटनाक्रम से बिजनेस पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा और कामकाज सामान्य तरीके से जारी रहेगा। 

आई-सून, एक शंघाई-आधारित कंपनी है। ये चीन को खुफिया जानकारी इकट्ठा करने, हैकिंग और दूसरी मॉनिटरिंग गतिविधियों को चलाने में मदद करती है। पिछले हफ्ते सॉफ्टवेयर और कोड-शेयरिंग प्लेटफॉर्म GitHub पर 190 मेगाबाइट जानकारी पोस्ट की गई थी। हैकिंग के जरिये लीक हुए दस्तावेजों की प्रामाणिकता अभी जांच के दायरे में है। 

लीक हुए दस्तावेज़ों में 2020 से भारत के लगभग 95GB इमिग्रेशन डिटेल्स, जिसे "एंट्री और एग्जिट पॉइंट डेटा" के तौर पर शामिल किया गया है। खास तौर पर तब से जब 2020 में गलवान घाटी झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव देखा गया था।

गिटहब लीक को सबसे पहले उजागर करने वाले ताइवान के शोधकर्ता अजाका ने बताया कि भारत हमेशा से चीन APT के केंद्र में रहा है। लीक हुए डेटा में अपोलो हॉस्पिटल सहित भारत के कुछ संगठन, 2020 में भारत आ रहे और जा रहे लोग, पीएमओ और जनसंख्या रिकॉर्ड शामिल हैं।

गूगल क्लाउड के स्वामित्व वाली कंपनी मेंडिएंट इंटेलिजेंस के चीफ एनालिस्ट जॉन हल्टक्विस्ट का कहना है कि ग्‍लोबल और चीन के साइबर जासूसी ऑपरेशन से जुड़े हैकर्स का ये ऑथेंटिक डेटा है। हमें बहुत मुश्किल से किसी तरह के इंटेलिजेंस ऑपरेशन के अंदरूनी कामकाज तक पहुंच मिलती है।  

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