न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) लागू करने की मांग को लेकर दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों को रोकने के लिए रास्ते में कीलें बिछाने, बैरिकेडिंग, लाठी चार्ज, वाटर कैनन का इस्तेमाल और आंसू गैस के गोले दागने जैसे हथकंडे अपनाने के बाद सरकार अब उनपर एक ऐसी मशीन इस्तेमाल करने की तैयारी में है, जो मौके पर मौजूद किसानों को बहरा बना सकती है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक किसानों के 'दिल्ली चलो' मार्च को रोकने के लिए दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर LRAD (Long-range acoustic device) डिवाइस लगाया गया है। यह मशीन ऐसी तरंगें पैदा करती है जो भीड़ में एक तरह की बेचैनी पैदा करती है। ज्यादा देर तक इसके प्रभाव क्षेत्र में रहने से लोगों की सुनने की क्षमता भी जा सकती है।
आंदोलन कर रहे किसानों को रोकने के लिए अगर सरकार इस LRAD सिस्टम का इस्तेमाल करती है, तो उसकी हानिकारक तरंगों से किसान बहरे भी हो सकते हैं।
बता दें कि सबसे पहले LRAD सिस्टम अमेरिकी सेना के द्वारा अल कायदा से मुकाबला के लिए विकसित किया गया था। एलआरएडी सिस्टम को आतंकवाद-रोधी अभियानों के दौरान उपयोग में लाया जाता है।
अमेरिकन स्पीच-लैंग्वेज-हियरिंग एसोसिएशन ने कुछ दिनों पहले LRAD सिस्टम को लेकर एक चेतावनी जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि इसके कारण लोगों में बहरापन, माइग्रेन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है।
बच्चों और बुजुर्गों को इससे अधिक नुकसान हो सकता है। हालांकि दुनिया के कई देशों की सेना और पुलिस ने इसे खरीदा है और आंदोलनों के दौरान भीड़ को कंट्रोल करने के लिए इसका उपयोग किया जाता रहा है।

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