सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी बॉन्ड यानी Electoral Bonds पर रोक लगाने के बबाद अब अगला नंबर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM को हटाने का आ सकता है। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के एक बयान से इसके संकेत मिल रहे हैं।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा कि चुनाव आयोग चुनावी बॉन्ड योजना के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करेगा। आयोग हमेशा सूचना के प्रवाह और भागीदारी में पारदर्शिता के आधार पर काम करता है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को दिए अपने हलफनामे में आयोग ने कहा है कि वह पारदर्शिता के पक्ष में है और जब आदेश जारी किया जाएगा, तो वह उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार कदम उठाएगा। ”
ईवीएम के प्रयोग के बिना चुनाव कराने को लेकर उच्चतम न्यायालय में लंबित मामले से जुड़े एक सवाल पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “फैसला आने दीजिए…अगर जरूरत पड़ी तो अदालत के निर्देश के मुताबिक बदलाव किए जाएंगे।”
बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने आगामी लोकसभा चुनाव से पहले बृहस्पतिवार को एक ऐतिहासिक फैसले में चुनावी बॉण्ड योजना को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए इस पर रोक लगाते हुए बॉन्ड के जरिये चंदा देने वालों, उसके मूल्यों और उनके प्राप्तकर्ताओं की जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने 2018 की इस योजना को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं सूचना के संवैधानिक अधिकारों का ‘उल्लंघन’ बताया था। अदालत केंद्र सरकार की इस दलील से सहमत नहीं थी कि इस योजना का उद्देश्य राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाना और काले धन पर अंकुश लगाना था।
देश में ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग बीते कई वर्षों से काफी तेजी से उठी है। ईवीएम के जरिये धांधली किए जाने की आशंका जताई जा रही है। प्रशांत भूषण समेत कई लोगों ने इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर कर रखी है। दूसरी ओर मोदी सरकार विपक्ष की इस मांग को दरकिनार करते हुए ईवीएम के बचाव और उसी से चुनाव कराने की दलील देती है।

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