बीते शनिवार और रविवार को आयोजित हुई यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा को उत्तर प्रदेश सरकार ने रद्द कर दिया है। यह फैसला परीक्षा में बड़े पैमाने पर हुई नकल, धांधली और पेपर लीक की शिकायतों को देखते हुए लिया गया है। इसे लेकर अभ्यर्थी जगह-जगह धरना-प्रदर्शन कर परीक्षा को रद्द करने की मांग राज्य सरकार से कर रहे थे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए शनिवार को बड़ा ऐलान किया। यूपी पुलिस में सिपाही के 60244 पदों के लिए हुई भर्ती परीक्षा को निरस्त कर दिया है। यह फैसला उन्होंने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में समीक्षा करने के बाद किया।
इस बैठक में डीजीपी प्रशांत कुमार, एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश, प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। साथ ही पुलिस भर्ती बोर्ड के अधिकारी भी मौजूद थे।
प्रदेश भर में इस परीक्षा का आयोजन 17-18 फरवरी को किया गया था। इसमें करीब 50 लाख युवाओं ने आवेदन किया था और 48 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। मुख्यमंत्री ने शिकायतों की बारीकी से जानकारी ली। उनके बारे में साक्ष्यों की पड़ताल की। इसके बाद
परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया गया।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि इन भर्तियों को छह माह के भीतर फिर से आयोजित किया जाए। साथ ही युवाओं की मेहनत और परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने के निर्देश सीएम ने दिए हैं।
उन्होंने एसटीएफ को सख्ती से जांच करने के भी निर्देश दिए। गौरतलब है कि परीक्षा की गोपनीयता भंग करने वाले एसटीएफ की रडार पर हैं और अबतक इसे लेकर एसटीएफ 300 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारियां कर चुकी है।

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