प्रॉपर्टी में निवेश अब होगा ओर शानदार, होने जा रहा है ये बड़ा बदलाव


पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने हाल ही में रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (Reits) और बुनियादी ढांचे में निवेश करने वाले इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर इन्‍वेस्‍टमेंट ट्रस्ट (InviTs) को नियंत्रित करने वाले नियमों में बदलाव को मंजूरी दे दी है, ताकि उन्हें निवेशकों के लिए अधिक स्वीकार्य बनाया जा सके।

क्‍या है Reits और InviTs 

Reits और InviTs म्यूचुअल फंड की तरह काम करते हैं. इसमें बांड या सिक्‍योरिटी के जरिये रियल एस्टेट या बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए निवेशकों से पूंजी जुटाई जाती है. दोनों निवेश पूलिंग के साधन हैं. रीट पोर्टफोलियो में कार्यालय, कॉरपोरेट पार्क यानी कार्यस्‍थल और शॉपिंग मॉल जैसे व्यावसायिक प्रोजेक्‍ट शामिल होते हैं. इन प्रोजेक्‍ट्स का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही पट्टे पर दिया गया यानी प्री लीज्‍ड होता है. इसी तरह एक इनविट में बुनियादी ढांचागत क्षेत्र के तहत आने वाली परिवहन, ऊर्जा या संचार आदि से जुड़ी परियोजनाएं शामिल होती हैं. रीट्स छोटे खुदरा निवेशकों को रियल एस्टेट संपत्तियों में निवेश कर उसमें आंशिक हिस्सेदारी यानी फ्रेक्शनल ओनरशिप के जरिये आमदनी का मौका देता है. इसी तरह, इनविट इंफ्रा सेक्‍टर की परियोजनाओं में व्यक्तिगत और संस्थागत निवेशकों से सीधे निवेश को सक्षम बनाता है.


कैसा रहा है अब तक का प्रदर्शन 

2019 में लॉन्च होने के बाद से, रीट्स ने आम निवेशकों के बीच अच्‍छी खासी लोकप्रियता हासिल की है. बाजार की प्रतिकूल स्थिति के कारण कमर्शियल संपत्तियों, कार्यालय, मॉल आदि के निर्माण में इस दौरान आई परेशानियों के बावजूद, रीट्स ने कोविड महामारी के दौरान किराये के रूप में एक स्थिर आय अर्जित की. इसी तरह InviTs के लिए भी निवेश संभावनाओं का एक बड़ा दायरा मौजूद है. करीब छह साल पहले 2017 में IRB InvIT फंड शेयर बाजारों में सूचीबद्ध पहला InvIT था, जबकि एम्बेसी ऑफिस पार्क्स रीट 2019 में शुरुआत करने वाला पहला रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट था. भारतीय बाजार में अब तक चार Reit लिस्टिंग हो चुकी हैं, और लगभग 21 सूचीबद्ध और असूचीबद्ध रीट फंड मौजूद हैं. इस साल यानी 2023 की शुरुआत में सेबी के साथ पंजीकृत InvITs और Reits के तहत कुल संपत्तियों का मूल्‍य 13.5 ट्रिलियन से अधिक था.


सेबी के ये संशोधन क्या हैं

नियमों में संशोधन के तहत सेबी ने InvITs और Reits के यूनिट धारकों को अब ट्रस्‍ट के बोर्ड में नॉमिनेशन राइट यानी नामांकन अधिकार दे दिए हैं. इसके साथ ही इन ट्रस्टों के प्रायोजकों (Sponsers) के लिए न्यूनतम यूनिट होल्डिंग संबंधी बाध्‍यताओं में भी बदलाव करते हुए "स्व-प्रायोजित निवेश प्रबंधकों (Self-sponsored investment managers)" की अवधारणा पेश की. रीट्स और इनविट्स के फॉलो-ऑन ऑफर पर भी विचार किया जा रहा है और इनकी पब्लिक लिस्टिंग की प्रक्रिया में लगने वाले समय को 12 दिन से घटा कर छह कार्य दिवस कर दिया है.

  • Reits और InviTs के नियमों में बदलाव को सेबी की मंजूरी
  • निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए नियामक ने उठाया नया कदम

पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने हाल ही में रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (Reits) और बुनियादी ढांचे में निवेश करने वाले इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर इन्‍वेस्‍टमेंट ट्रस्ट (InviTs) को नियंत्रित करने वाले नियमों में बदलाव को मंजूरी दे दी है, ताकि उन्हें निवेशकों के लिए अधिक स्वीकार्य बनाया जा सके।


क्‍या है Reits और InviTs 

Reits और InviTs म्यूचुअल फंड की तरह काम करते हैं. इसमें बांड या सिक्‍योरिटी के जरिये रियल एस्टेट या बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए निवेशकों से पूंजी जुटाई जाती है. दोनों निवेश पूलिंग के साधन हैं. रीट पोर्टफोलियो में कार्यालय, कॉरपोरेट पार्क यानी कार्यस्‍थल और शॉपिंग मॉल जैसे व्यावसायिक प्रोजेक्‍ट शामिल होते हैं. इन प्रोजेक्‍ट्स का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही पट्टे पर दिया गया यानी प्री लीज्‍ड होता है. इसी तरह एक इनविट में बुनियादी ढांचागत क्षेत्र के तहत आने वाली परिवहन, ऊर्जा या संचार आदि से जुड़ी परियोजनाएं शामिल होती हैं. रीट्स छोटे खुदरा निवेशकों को रियल एस्टेट संपत्तियों में निवेश कर उसमें आंशिक हिस्सेदारी यानी फ्रेक्शनल ओनरशिप के जरिये आमदनी का मौका देता है. इसी तरह, इनविट इंफ्रा सेक्‍टर की परियोजनाओं में व्यक्तिगत और संस्थागत निवेशकों से सीधे निवेश को सक्षम बनाता है.


कैसा रहा है अब तक का प्रदर्शन 

2019 में लॉन्च होने के बाद से, रीट्स ने आम निवेशकों के बीच अच्‍छी खासी लोकप्रियता हासिल की है. बाजार की प्रतिकूल स्थिति के कारण कमर्शियल संपत्तियों, कार्यालय, मॉल आदि के निर्माण में इस दौरान आई परेशानियों के बावजूद, रीट्स ने कोविड महामारी के दौरान किराये के रूप में एक स्थिर आय अर्जित की. इसी तरह InviTs के लिए भी निवेश संभावनाओं का एक बड़ा दायरा मौजूद है. करीब छह साल पहले 2017 में IRB InvIT फंड शेयर बाजारों में सूचीबद्ध पहला InvIT था, जबकि एम्बेसी ऑफिस पार्क्स रीट 2019 में शुरुआत करने वाला पहला रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट था. भारतीय बाजार में अब तक चार Reit लिस्टिंग हो चुकी हैं, और लगभग 21 सूचीबद्ध और असूचीबद्ध रीट फंड मौजूद हैं. इस साल यानी 2023 की शुरुआत में सेबी के साथ पंजीकृत InvITs और Reits के तहत कुल संपत्तियों का मूल्‍य 13.5 ट्रिलियन से अधिक था.


सेबी के ये संशोधन क्या हैं

नियमों में संशोधन के तहत सेबी ने InvITs और Reits के यूनिट धारकों को अब ट्रस्‍ट के बोर्ड में नॉमिनेशन राइट यानी नामांकन अधिकार दे दिए हैं. इसके साथ ही इन ट्रस्टों के प्रायोजकों (Sponsers) के लिए न्यूनतम यूनिट होल्डिंग संबंधी बाध्‍यताओं में भी बदलाव करते हुए "स्व-प्रायोजित निवेश प्रबंधकों (Self-sponsored investment managers)" की अवधारणा पेश की. रीट्स और इनविट्स के फॉलो-ऑन ऑफर पर भी विचार किया जा रहा है और इनकी पब्लिक लिस्टिंग की प्रक्रिया में लगने वाले समय को 12 दिन से घटा कर छह कार्य दिवस कर दिया है.


क्यों महत्वपूर्ण हैं ये बदलाव 

सेबी की ओर से किए गए इन बदलावों का मकसद कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बेहतर बनाकर  InvITs और Reits के संचालन को ज्‍यादा व्‍यवस्थित और सुचारु करना है. साथ ही इससे रिटेल यूनिट धारकों को अपने अधिकारों को लेकर विचार रखने का मौका मिलेगा. "स्टीवर्डशिप कोड" के सिद्धांत अब सभी यूनिट धारकों (10% या अधिक यूनिट वाले) पर लागू होंगे, जिससे प्रबंधन की जवाबदेही बढ़ेगी. स्पोंसर्स को भी अब रीट या इनविट की पूरी अवधि के लिए न्यूनतम संख्या में इकाइयां अपने पास रखनी होंगी. नए नियमों के तहत अब स्व-प्रायोजित यानी सेल्‍फ स्‍पॉसर्ड निवेश प्रबंधक रीट प्रायोजकों की जिम्मेदारी ले सकते हैं और बाद वाले को निवेश से बाहर निकलने की सुविधा प्रदान कर सकते हैं.


Reits और InviTs की संभावनाएं कैसी हैं

InvITs और Reits ने दीर्घकालिक रिटर्न देने वाले ऐसेट क्‍लास के रूप में वैश्विक स्‍तर पर अपनी जगह बनाई है. अतीत में अच्छा प्रदर्शन करने के कारण आने वाले समय में भी इसमें निवेशकों की रुचि अधिक रहने की संभावना है. ऐसे में आगे चलकर, कई और रीट्स और इनविट्स आने की उम्मीद है. इससे ये फंड आकार में बड़े हो सकते हैं और इनके ऐसेट क्‍लास में ज्‍यादा विविधता भी आ सकती है. ऐसा होने पर इनका दायरा हाईवे और कॉमर्शिलय प्रॉपर्टी बढ़कर अन्‍य क्षेत्रों की रीयल एस्‍टेट संपत्तियों तक भी जा सकता है. चूंकि सेबी नियमों में बदलाव के जरिये इनके प्रबंधन को और बेहतर व मजबूत बना रहा है, इसलिए आगामी मुद्दों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है.






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