कई बार लोगों की छोटी सी असावधानी जानलेवा बन जाती है, तो कभी-कभी किसी शख्स की सूझबूझ और सतर्कता किसी बड़े संकट या हादसे को टाल देती है. एक ऐसी ही घटना कर्नाटक के मंगलूरू के पास देखने को मिली है.
एक 70 वर्षीय महिला ने एक बड़े रेल हादसे को टालकर और कई लोगों की जान बचाकर साबित कर दिया कि अक्लमंदी पर केवल पढ़े-लिखे लोगों का ही एकाधिकार नहीं होता, बल्कि कई बार गांव-देहात के अशिक्षित लोगों में भी ऐसी समझदारी होती है, जो लोगों के लिए वरदान बन जाती है. कुछ ऐसा ही काम करते हुए पंचंदी के पास मंदरा में मंगलुरु के बाहरी इलाके में रहने वाली बुजुर्ग महिला की सूझ-बूझ से सैकड़ों लोगों की जान बच गई.
इस बुजुर्ग महिला का नाम है चंद्रावती. उन्होंने देखा कि रेलवे ट्रैक पर मंदरा के पास पेड़ गिरा हुआ है. और उसी ट्रैक पर मंगलुरु से मुंबई जाने वाली मत्स्यगंधा एक्सप्रेस ट्रेन तेजी से आ रही थी. खतरे को भांपकर चंद्रवती तुरंत अपने घर पहुंची और एक लाल कपड़ा लाकर रेलवे ट्रैक पर लहराने लगीं.
खुशकिस्मती से, ट्रेन के लोको पायलट नें जब एक महिला को लाल कपड़ा लहराते देखा तो वह समझ गए कि कोई खतरा हो सकता है और उन्होंने ट्रेन को धीमा करके रोक दिया. बाद में रेलवे कर्मी मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों की मदद से ट्रैक को साफ किया, जिसके बाद ट्रेन फिर चल पड़ी.
इस तरह चंद्रवती की समय पर कार्रवाई और सूझबूझ से न केवल ट्रेन और पेड़ की टक्कर टल गई, बल्कि ट्रेन में सवार सैकड़ों लोगों की जान भी बच गई. मौके पर मौजूद ट्रेन के स्टाफ और रेल यात्रियों ने वृद्धा की इस सूझबूझ की जमकर सराहना की.
रेलवे पुलिस ने भी चंद्रवती की बहादुरी को सराहा. मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में, मंगलुरु में रेलवे पुलिस ने अपने सभी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ, 70 वर्षीय महिला को उसके वीरतापूर्ण कार्य के लिए सम्मानित किया.
बता दें कि पिछले साल उत्तर प्रदेश के एटा में भी इसी तरह की घटना हुई थी, जब एक महिला ने टूटे रेलवे ट्रैक को देखकर अपनी लाल साड़ी से ट्रेन रुकवा कर सैकड़ों यात्रियों की जान बचाई थी.

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