इस सरकारी नौकरी के लिए कर रहे हैं ऑनलाइन आवेदन, तो हो जाएं सावधान : हो जाएंगे ठगी के शिकार !


जालसाजों ने बेल्ट्रॉन की फर्जी वेबसाइट बना कर नौकरी का विज्ञापन निकाला और ठगी की कोशिश की। जालसाजों ने असली वेबसाइट से मिलते-जुलते तथ्यों को डाल दिया।

मामले की जानकारी बेल्ट्रॉन प्रशासन को हो गई और फिर परियोजना शीर्ष जाहिद लतीफ ने अज्ञात जालसाजों के खिलाफ में शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई।

अब पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए साइबर क्राइम सेल की मदद ली है। पुलिस उस आइपी एड्रेस को तलाशने में जुट गई है, जिससे उस वेबसाइट को बनाया गया।

हालांकि उस आईपी एड्रेस भी फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है। कुछ इसी तरह की पटना हाइकोर्ट की वेबसाइट को भी जालसाजों ने बना लिया था और नौकरी का विज्ञापन निकालने के साथ ही रिजल्ट भी प्रकाशित करने लगे थे।

इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी। शास्त्रीनगर थानाध्यक्ष राम शंकर सिंह ने मामला दर्ज किए जाने की पुष्टि की और बताया कि जांच की जा रही है।

जालसाज इतने शातिर हैं कि उन्होंने बेल्ट्रान की फर्जी वेबसाइट इस तरह बनाई है, जिससे वह एकदम वास्तविक लगे और देखने वाले भी समझ नहीं पाएं।

इसके साथ ही वास्तविक वेबसाइट की तरह ही सभी तरह के तथ्य व डिजाइनिंग भी कर दी गई है। केवल उसके यूआरएल एड्रेस में हल्का-सा बदलाव है।

बेल्ट्रॉन की मूल वेबसाइट bsedc.bihar.gov.in है, जबकि जालसाजों की बनाई गई वेबसाइट का यूआरएल एड्रेस bsedc.bihargov.co.in है।

फर्जी वेबसाइट में बिहार डॉट जीओवी को एक साथ कर दिया गया है और डॉट को हटा दिया गया है।

उसमें नौकरी का विज्ञापन निकाल कर आवेदन तक भरने की सुविधा देकर आम लोगों से रुपए ठगने की कोशिश की जा रही थी।

बेल्ट्रॉन ने दर्ज़ कराई FIR

इसके संबंध में कई लोगों से बेल्ट्रॉन को तुरंत जानकारी मिल गई और फिर प्राथमिकी दर्ज करा दी गई।

फर्जी वेबसाइट बनाकर युवाओं से कृषि विभाग में नौकरी के लिए आवेदन मांगनी वाली वेबसाइटों के संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी कराने का आदेश दिया गया है।

इसकी पुष्टि कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने की है। कृषि मंत्री ने बताया कि कुछ फर्जी संस्थान पंचायत किसान मित्र एवं प्रखंड किसान मित्र के लिए आवेदन मांग कर युवाओं को ठग रहे हैं।

यह मामला उनकी संज्ञान में आया था, जिसके आधार पर एजेंसी वेबसाइटों को चिह्नित कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कहा गया है।

अमरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पता चला है कि राष्ट्रीय किसान सहायता केंद्र नाम के संस्थान की तरफ से एक विज्ञापन जारी किया गया।

इसमें कृषि विभाग के लोगो के साथ भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के लोगो का भी उपयोग किया गया है। यह पूरी तरह से फर्जी है। 

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