झारखंड के 57 लाख लाभुकों के लिए बुरी खबर है। आज सोमवार 31 जनवरी को राज्य में आयुष्मान योजना खत्म हो गयी है। जी! बिल्कुल सही पढ़ा आपने।
दरअसल झारखंड से ही 23 सितंबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की थी। वहीं एक के बाद एक यह कारवां आगे बढ़ता गया।
आज पूरे देश में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज किया जा रहा है, लेकिन जहां से इस योजना की शुरुआत हुई थी, उसी झारखंड में योजना दम तोड़ रही है।
31 जनवरी को झारखंड में आयुष्मान योजना खत्म हो गयी है, जिससे मरीजों का इलाज अब आयुष्मान योजना के तहत होने पर संशय बना हुआ है।
वहीं इसके एक्सटेंशन को लेकर विभाग ने भी गंभीरता नहीं दिखायी, जिससे साफ है कि यहां के मरीजों को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है।
यहां बता दें कि योजना शुरू होने के बाद झारखंड में झारखंड के 57 लाख परिवार इससे जुड़े, जिसमें से योजना के अंतर्गत 10 लाख से अधिक लाभुकों का इलाज और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करायी गयीं।
1000 करोड़ से अधिक इलाज में खर्च हुआ, जिसमें सरकारी और प्राइवेट दोनों ही हॉस्पिटल शामिल हैं।
इधर इस मामले में अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने कहा कि योजना की लास्ट डेडलाइन 31 जनवरी थी।
हमने 28 फरवरी 2022 तक इसे बढ़ाने का प्रस्ताव तत्काल भेज दिया है, जहां तक मरीजों के इलाज की बात है, तो वह प्रभावित नहीं होगी।
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